बेंगलुरु , अगस्त 30 -- कर्नाटक में महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित अनियमितताओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रस्तावित पदयात्रा अब 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर एक लंबे राजनीतिक अभियान का रूप ले रही है।

पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने घोषणा की है कि पार्टी का आंदोलन अगले दो साल तक जारी रहेगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है, जिससे भाजपा के अभियान की तत्काल वजह शायद खत्म हो गयी है, लेकिन श्री श्रीरामुलु ने कहा है कि इस्तीफे की वजह से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा की मांगें व्यापक हैं और वह अगले विधानसभा चुनाव तक इस मुद्दे को उठाए रखेगी।

उन्होंने ने कहा, "इस्तीफा अंत नहीं है। हमारी पदयात्रा नहीं रुकेगी। हमारी लड़ाई 2028 तक हर पल और हर घंटे जारी रहेगी।" उनके इस बयान से प्रस्तावित पदयात्रा का स्वरूप बदल गया है। अब यह सिर्फ़ श्री नागेंद्र और वाल्मीकि निगम मामले तक सीमित विरोध-प्रदर्शन नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ एक लंबा राजनीतिक अभियान बन गया है। उन्होंने बताया कि भाजपा ने राज्य पार्टी अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र, विपक्ष के नेता आर. अशोक, पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत के बाद 10 मांगें तय की हैं।

वाल्मीकि निगम से कथित तौर पर हस्तांतरित की गयीं राशि की पुन: प्राप्ति मुख्य मांगों में से एक होगी, लेकिन श्री श्रीरामुलु ने कहा कि यह अभियान आरक्षण के मुद्दों, अनुसूचित जाति/जनजाति सब-प्लान फंड के कथित डायवर्जन और कल्याणा कर्नाटक में विकास से जुड़ी चिंताओं को भी उठाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा मंत्रिमंडल में श्री नागेंद्र की जगह किसी और को लाकर इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से ठंडा नहीं पड़ने देगी।

श्री श्रीरामुलु ने कहा कि अगर अन्नपूर्णा तुकाराम समेत किसी और नेता को भी मंत्री बनाया जाता है, तब भी पार्टी अपना आंदोलन जारी रखेगी। इस कदम से भाजपा को एक ऐसा राजनीतिक मुद्दा मिल गया है जिसे मौजूदा विवाद से आगे 2028 के चुनावी मुकाबले तक ले जाया जा सकता है, खासकर कल्याणा कर्नाटक इलाके में, जहां वाल्मीकि कॉर्पोरेशन का मुद्दा काफी अहम राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

उन्होंने इस प्रस्तावित अभियान को इलाके की व्यापक चिंताओं से भी जोड़ा, जिनमें डॉक्टरों और शिक्षकों की कमी, सरकारी पदों का खाली होना, अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन और रुका हुआ नवाली जलाशय परियोजना शामिल हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि राज्य कैबिनेट में जो भी हो भाजपा अपना आंदोलन जारी रखेगी।

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