बेंगलुरु , अक्टूबर 29 -- कर्नाटक कांग्रेस में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मतभेद सामने आये हैं। राज्य के मंत्री सतीश जारकीहोली ने जहां इस प्रक्रिया और करीब एक करोड़ नाम हटाए जाने का बचाव किया वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद ने अनुपस्थित श्रेणी में रखे गये मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाये हैं।
दोनों नेताओं के अलग-अलग रुख से कांग्रेस के सामने एक अहम सवाल खड़ा हो गया है कि मतदाताओं की संख्या में कमी अयोग्य प्रविष्टियों को हटाने का परिणाम है या पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर हो गये हैं।
श्री जारकीहोली ने राज्य में इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिए जाने के कारण यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हुई। उन्होंने कहा कि पार्टी को पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार में एसआईआर किए जाने के तरीके पर आपत्ति थी। उन्होंने कहा, "हमारी आपत्ति पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार में किए गए एसआईआर को लेकर है।"उन्होंने कहा, "कर्नाटक में एसआईआर सही तरीके से किया गया, क्योंकि हमने विरोध प्रदर्शन किया और अपने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया। हमारा तर्क है कि दूसरे राज्यों में भी एसआईआर इसी तरीके से किया जाना चाहिए था।" करीब एक करोड़ नाम हटाए जाने का बचाव करते हुए श्री जारकीहोली ने कहा कि इनमें ऐसे मतदाता शामिल थे, जिन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या फिर जिनके नाम मतदाता सूची में एक से अधिक बार दर्ज थे।
श्री हरिप्रसाद ने हालांकि इस मामले में अलग रुख अपनाया। उन्होंने मृतकों और दोहरे नामों को सूची से हटाए जाने को उचित माना, लेकिन अन्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "एक करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं। हमारा आंदोलन इसी के खिलाफ है।"उन्होंने सवाल किया, "हमारा सवाल उन मतदाताओं को लेकर है, जिन्हें 'अनुपस्थित' के रूप में चिह्नित किया गया है। ये मतदाता आखिर कहां चले गये?"दोनों नेताओं के अलग-अलग बयान महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे एक ही प्रक्रिया के अलग-अलग पहलुओं पर बात कर रहे हैं। श्री जारकीहोली ने प्रक्रिया और अयोग्य प्रविष्टियों को हटाए जाने का बचाव किया है, जबकि श्री हरिप्रसाद ने सवाल उठाया है कि क्या अनुपस्थित मतदाताओं के वर्गीकरण के कारण पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर हो गये हैं।
गत 27 अक्टूबर को प्रकाशित कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची में कुल 4,55,00,011 मतदाता दर्ज थे, जबकि पुनरीक्षण से पहले यह संख्या 5,54,32,314 थी। इस तरह मतदाताओं की संख्या में 99,32,303 की कमी आई है।
इन आंकड़ों के बाद नाम हटाए जाने के आधार, अनुपस्थित मतदाताओं के सत्यापन और मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा शामिल कराने के इच्छुक लोगों के लिए उपलब्ध उपायों को लेकर बहस तेज हो गयी है।
कांग्रेस ने फॉर्म-7 आवेदनों पर कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई है। इस फॉर्म के माध्यम से मतदाता सूची में दर्ज नामों पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। पार्टी की चिंताओं का आकलन करने के लिए ऐसे मामलों के सत्यापन और निपटारे से जुड़ी चुनाव आयोग की प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग हटाए गए नामों का श्रेणीवार स्पष्ट ब्योरा दे सकता है और यह बता सकता है कि मतदाताओं को अनुपस्थित घोषित करने से पहले उनका किस तरह सत्यापन किया गया था।
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