बेंगलुरु , जुलाई 14 -- कर्नाटक के किसान संगठनों के एक समूह ने बिदादी में प्रस्तावित 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप' (जीबीआईटी) परियोजना के खिलाफ़ अपना विरोध तेज़ करते हुए मंगलवार को राज्य सरकार को चेतावनी दी कि अगर ज़बरदस्ती ज़मीन का अधिग्रहण किया गया तो वे पूरे राज्य में आंदोलन करेंगे।

किसान, दलित, मज़दूर, छात्र, युवा एवं महिला संगठनों के साझा मंच 'संयुक्त होराटा-कर्नाटक' ने आरोप लगाया कि ज़मीन मालिकों के लगातार विरोध के बावजूद सरकार भारी पुलिस बल को तैनात कर संयुक्त ज़मीन मापन एवं सर्वेक्षण कार्य को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सरकार पर विरोध कर रहे किसानों से किए गए वादों से मुकरने का आरोप भी लगाया।

संगठनों ने कहा कि किसान 18 महीने से ज़्यादा समय से जीबीआईटी परियोजना का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने बार-बार कहा है कि वे न तो अपनी ज़मीन बेचेंगे और न ही उसे अधिग्रहित होने देंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने प्रभावित किसानों और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच बैठक कराने का वादा किया था लेकिन सरकार ने इसके बजाय सर्वे का काम आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। उन्होंने इस कदम को भरोसा तोड़ने वाला और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया।

संगठनों ने मुख्यमंत्री से इसमें तुरंत दखल देने की मांग की और सरकार से टाउनशिप का प्रस्ताव छोड़ने का आग्रह किया। उनका तर्क है कि इससे उपजाऊ एवं सिंचित कृषि भूमि नष्ट हो जायेगी, जिस पर कई प्रकार की फसलें उगायी जाती हैं और जो सैकड़ों किसान परिवारों की आजीविका का आधार है।

संगठनों ने चेतावनी दी, "अगर सरकार ज़बरदस्ती ज़मीन अधिग्रहण करने की कोशिश करती है, तो यह सिर्फ़ बिदादी के किसानों का संघर्ष नहीं रहेगा बल्कि पूरे कर्नाटक के किसान मिलकर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।"सर्वे से जुड़े कामों के दौरान सोमवार को किसानों एवं अधिकारियों के बीच हुई झड़प का उल्लेख करते हुए, संगठनों ने तनाव बढ़ने के लिए सरकार के रवैये को ज़िम्मेदार ठहराया। साथ ही, उन्होंने किसानों से शांति बनाए रखने एवं लोकतांत्रिक तरीकों से अपना विरोध जारी रखने की अपील की।

कर्नाटक राज्य रायथा संघ और हसीरू सेना के अध्यक्ष एचआर बसवराजप्पा, कर्नाटक राज्य रायथा संघ के अध्यक्ष बडगलापुरा नागेंद्र, सभापतिमंडल सदस्य चुक्की नंजुंदास्वामी, कर्नाटक प्रांत रायथा संघ के महासचिव टी यशवंत और अन्य किसान नेताओं ने संयुक्त रूप से यह बयान जारी किया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित