मादिकेरी , सितंबर 11 -- कर्नाटक में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के विरोध में बढ़ते दबाव के बीच, शुक्रवार को मादिकेरी में हज़ारों किसानों एवं विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर एक बड़ा, गैर-राजनीतिक विरोध प्रदर्शन किया और रिपोर्ट की सिफारिशों को पूरी तरह से खारिज करने की मांग की।
किसान संगठनों की अगुवाई में प्रदर्शनकारियों ने करियप्पा सर्कल से एक रैली निकाली और पूरे मादिकेरी में मार्च किया। उन्होंने रिपोर्ट के खिलाफ़ नारे लगाए और चेतावनी दी कि इसे लागू करने से पश्चिमी घाट में रहने वाले लोगों की खेती, आजीविका एवं भविष्य पर बुरा असर पड़ेगा। कई संगठनों के प्रतिनिधि इस आंदोलन में शामिल हुए जिससे इस विरोध ने राजनीतिक संबद्धता से आगे बढ़ते हुए एक व्यापक रूप ले लिया।
तत्कालीन चिंता केंद्र सरकार का सातवां मसौदा अधिसूचना है, जिसमें पश्चिमी घाट में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र से जुड़ी पाबंदियां लगाने का प्रस्ताव है। इस नए प्रस्ताव में कर्नाटक के 20,668 वर्ग किलोमीटर का इलाका शामिल है, जो 10 ज़िलों के 33 तालुकों और 1,449 गांवों तक विस्तृत है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि खेती वाली ज़मीन और रिहायशी क्षेत्रों को प्रस्तावित ईएसए के दायरे से बाहर रखा जाए और राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह लोगों के विरोध को केंद्र तक मज़बूती से पहुंचाए। उन्होंने ईएसए क्षेत्रों की अंतिम सीमा तय करने से पहले ज़मीन पर जाकर सर्वे करने की भी मांग की।
यह विरोध-प्रदर्शन कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र से पहले हो रहा है। राज्य मंत्रिमंडल ने 21 से 23 सितंबर तक तीन दिन का विशेष सत्र बुलाने का फ़ैसला किया है, जिसमें चर्चा के लिए जिन अहम मुद्दों पर बात होने की उम्मीद है, उनमें यह रिपोर्ट भी शामिल है।
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