बेंगलुरु , जुलाई 21 -- कर्नाटक मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच तालमेल और शक्ति संतुलन की कवायद के चलते मंत्रिमंडल विस्तार अब तीन शक्ति केंद्रों की रस्साकशी का रूप लेता नजर आ रहा है।

मंगलवार को जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद पार्टी आलाकमान से परामर्श के लिए नयी दिल्ली रवाना हुए, तो उनके सामने मुद्दा सिर्फ खाली पड़े मंत्री पदों को भरने तक सीमित नहीं था। यह मुद्दा कर्नाटक कांग्रेस की पहचान बन चुके तीन प्रभाव-केंद्रों के बीच तालमेल बिठाने का था।

मंत्रिपरिषद में करीब 20 पद रिक्त हैं, जबकि दावेदारों की संख्या इससे दोगुने से भी अधिक है। ऐसे में गणित तो आसान है, लेकिन राजनीतिक समीकरण कहीं अधिक जटिल हैं। विभिन्न गुटों, क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ हाईकमान की प्राथमिकताओं के बीच नए मंत्रियों के चयन को लेकर फैसला चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

कांग्रेस खुद को असामान्य स्थिति में पा रही है। आमतौर पर सरकारों में मुख्यमंत्री का फैसला ही मंत्रिमंडल तय करता है लेकिन कर्नाटक में यह प्रक्रिया तीन अलग-अलग शक्ति केंद्रों श्री शिवकुमार, श्री सिद्दारमैया और पार्टी आलाकमान से तय हो रही है। हर केंद्र की अपनी राजनीतिक मजबूरियां, वफादार और अपेक्षाएं हैं। किसी एक खेमे को मिलने वाली हर सीट को दूसरा खेमा अपनी हार के रूप में देखता है।

इसलिए दिल्ली में हो रही बैठक सिर्फ किसी सूची पर मुहर लगाने के बजाय एक-एक नाम पर सौदेबाजी करने जैसी है।

पार्टी सूत्रों के संकेत के अनुसार, श्री शिवकुमार ने एचसी बालकृष्ण, श्री लक्ष्मण सावदी, श्री मधु बंगारप्पा, श्री शरद बच्चेगौड़ा, श्री तनवीर सेठ या श्री रिजवान अरशद, श्री यशवंतराय गौड़ा पाटिल, सुश्री लक्ष्मी हेब्बालकर और श्री श्रीनिवास माने जैसे नेताओं की पैरवी की है।

वहीं श्री सिद्दारमैया खेमे ने श्री संतोष लाड, श्री पुत्तरंग शेट्टी, श्री लेआउट कृष्णाप्पा, श्री शिवलिंगेगौड़ा, श्री ए एस पोन्नन्ना, श्री बीजेड जमीर अहमद खान, श्री रघुमूर्ति चल्लाकेरे, श्री प्रसाद अब्बैया, श्री विजयानंद कशप्पनवर, श्री अशोक पट्टण और श्री शिवानंद पाटिल या श्री बसवराज रायरेड्डी में से किसी एक को तवज्जो दी है।

इन दोनों सूचियों से अलग कांग्रेस आलाकमान की भी अपनी पसंद है। इसमें श्री दिनेश गुंडू राव, श्री जीएस पाटिल, श्री अजय सिंह और श्री बीआर पाटिल जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

चुनौती केवल नामों को शामिल करने की नहीं है। हर नये मंत्री के शामिल होने का असर व्यक्तिगत स्तर से कहीं आगे तक जाता है। यह क्षेत्रों, समुदायों, जातियों और गुटों के बीच के समीकरणों को बदल देता है। इससे समर्थकों में उम्मीदें जगती हैं और बाहर छूट जाने वालों में निराशा पैदा होती है। कर्नाटक में मंत्रिमंडल का गठन हमेशा प्रशासनिक सुविधा से ज्यादा राजनीतिक संतुलन साधने का गणित रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित