बेंगलुरु , सितंबर 18 -- कर्नाटक में पशुचिकित्सा अधिकारी भर्ती का घोटाला गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अपराध जाँच विभाग (सीआईडी) 11 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन के सिलसिले की जांच कर रही है और इस मामले में शामिल अभ्यर्थियों एवं जिन लोगों के नाम सामने आये हैं, उनके बैंक खातों की गहनता से पड़ताल कर रही है।
अभ्यर्थियों के सीआईडी अधिकारियों को यह बताये जाने के बाद जांच में तेजी आयी है कि पशुचिकित्सा अधिकारी की नौकरी पाने के लिए पैसे दिये गये थे। इसके बाद जांचकर्ता अब बैंक खातों के जरिये पैसों के लेन-देन का पता लगा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इस जांच के दायरे में 11 अभ्यर्थी और लगभग 11 करोड़ रुपये का लेन-देन शामिल है। अभ्यर्थियों के दर्ज बयानों से जांचकर्ताओं को इस बात के महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं कि पैसों की यह वसूली किस तरह से संगठित की गयी थी और रकम किसे दी गयी थी।
ज्ञानेन्द्र नाम के अभ्यर्थी के बैंक खाते में किये गये 70 लाख रुपये के हस्तांतरण को जांच का मुख्य बिंदु माना जा रहा है। सीआईडी अधिकारी इस रकम के हस्तांतरण से जुड़ी परिस्थितियों और भर्ती प्रक्रिया के साथ इसके कथित संबंध की जांच कर रहे हैं।
बसवराज कन्नाले की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गयी है। जांचकर्ता उनके और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रहे हैं।
इस जांच में एक नया मोड़ तब आया, जब यह आरोप लगा कि कुछ अभ्यर्थियों ने जानबूझकर बैंक खातों से पैसे डाले, ताकि लेन-देन का रिकॉर्ड बना रहे।
पूछताछ में सामने आयी जानकारी के अनुसार, अभ्यर्थियों को इस बात का डर था कि यदि नौकरी नहीं मिली तो झूठा वादा करने वाले लोग पैसे मिलने से इनकार कर सकते हैं। इसलिए उन्होंने रकम का कम से कम एक हिस्सा पहचाने जाने योग्य बैंकिंग माध्यमों से हस्तांतरित किया।
जांचकर्ता अब पैसों के लेन-देन का सुराग जुटा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि रकम किसे मिली, कितनी राशि हस्तांतरित की गयी और क्या इन पैसों का संबंध नौकरी देने के वादे से था या भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी से था।
पूछताछ के दौरान लगभग नौ अभ्यर्थियों ने सीआईडी अधिकारियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी है, जिससे जांचकर्ताओं को इस कथित गिरोह के खिलाफ और सुराग मिले हैं।
अभ्यर्थियों को करीब 80-80 लाख रुपये के भुगतान के बदले नौकरी देने का वादा किया गया था। सीआईडी अधिकारी इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रहे हैं और बैंक रिकॉर्ड, बयानों तथा अन्य सबूतों से उनका मिलान कर रहे हैं।
जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या अभ्यर्थी खुद, विशेष रूप से अपने वित्तीय लेन-देन के माध्यम से, भर्ती गिरोह चलाने वालों के खिलाफ सबूत का महत्वपूर्ण जरिया बन गये हैं।
सीआईडी अधिकारी अभ्यर्थियों के ज्ञानेन्द्र, बसवराज कन्नाले और उनसे जुड़े लोगों को किये गये भुगतान का ब्योरा एकत्र कर रहे हैं तथा इन लेन-देन के उद्देश्य और क्रम की जांच कर रहे हैं। यह वित्तीय साक्ष्य जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, क्योंकि एजेंसी भर्ती में हुई धांधली के पीछे के नेटवर्क का पर्दाफाश करने और यह तय करने में जुटी है कि क्या पैसों का हस्तांतरण सीधे तौर पर भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था।
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