बेंगलुरु , जुलाई 16 -- कर्नाटक ने लंबे समय से मानसून की कमी के कारण सूखे के हालात को "राष्ट्रीय आपदा" घोषित किये जाने तथा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के नियमों में ढील दिये जाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया है।

उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि शुरुआती आकलन से पता चला है कि राज्य के कई हिस्सों में 80 प्रतिशत तक फसल का नुकसान हुआ है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान लगातार बारिश की कमी ने कृषि, पेयजल सुरक्षा, भूजल स्थिरता एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न किया है जिससे केंद्र के तत्काल हस्तक्षेप और ज्यादा वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में जून महीने में 42 प्रतिशत कम बारिश हुई जबकि कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। बारिश की कमी जुलाई में भी जारी है और राज्य में बारिश 34 प्रतिशत कम हुई है जबकि बेंगलुरु में भी सामान्य से लगभग 34 प्रतिशत कम कम हुई है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक आकलनों से संकेत मिलता है कि अपर्याप्त बारिश एवं उच्च तापमान के कारण कई प्रभावित क्षेत्रों में फसल का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा नष्ट हो गया है। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों का मुख्य कारण अलनीनो के प्रभाव को बताया और कहा कि कई जिलों में भूजल स्तर चिंताजनक रूप से घट गया है, जिससे सिंचाई एवं पेयजल संबंधी चिंताएं और बढ़ गयी हैं।

श्री परमेश्वर ने एनडीआरएफ की मदद के लिए योग्य छोटे एवं सीमांत किसानों की संख्या तय करने के लिए राज्य की किसान पंजीकरण एवं एकीकृत लाभार्थी सूचना प्रणाली (फ्रूट्स) डेटाबेस को स्वीकार करने की मांग की। उनका तर्क है कि इस काम के लिए अभी इस्तेमाल की जा रही 2015-16 की कृषि जनगणना, खेती की ज़मीन के मालिकाना हक के मौजूदा पैटर्न को नहीं दर्शाती है। उन्होंने 'सूखा मैनुअल, 2020' के प्रावधानों को एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के राहत नियमों के साथ एक जैसा करने की भी मांग की। उन्होंने बताया कि जहां राहत दिशा-निर्देश 33 प्रतिशत से ज़्यादा फसल नुकसान पर मदद देती हैं, वहीं सूखा मैनुअल गंभीर सूखे को तभी मानता है जब फसल का नुकसान 50 प्रतिशत से ज़्यादा हो।

उप-मुख्यमंत्री ने सूखे की स्थिति का आकलन करने में ज़्यादा लचीलापन लाने, वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर कम समय के सूखे को मान्यता देने और सूखे की जल्द घोषणा से जुड़े नियमों में बदलाव करने की भी मांग की ताकि प्रभावित किसानों तक समय पर राहत पहुंच सके।

श्री परमेश्वर ने कहा कि संकट का दायरा इतना बड़ा है कि इसके लिए असाधारण उपाय करने की ज़रूरत है। उन्होंने केंद्र से अपील की कि मौजूदा सूखे को "राष्ट्रीय आपदा" घोषित किया जाये या उसी के अनुसार मदद दी जाये। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के समय पर दखल देने से किसानों की आजीविका बचाने, पीने के पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कर्नाटक में सार्वजनिक जल प्रणालियों पर निर्भर लाखों लोगों को राहत पहुंचाने में मदद मिलेगी।

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