बेंगलुरु , सितंबर 06 -- कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने रविवार को जल्द ही पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को फिर से लागू करने की जानकारी देते हुए सरकारी कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि नयी पेंशन योजना (एनपीएस) को खत्म कर दिया जाएगा और अब राज्य के शिक्षक अपने नाम के आगे सम्मानजनक उपसर्ग 'टीआर' का प्रयोग कर करेंगे।
डॉ. परमेश्वर ने विधान सौध में आयोजित राज्य-स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह और शिक्षकों के लिए राज्य पुरस्कार समारोह में कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पेंशन योजना पर कांग्रेस पार्टी के चुनाव-पूर्व वादे को पूरा करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, "कुछ कारणों से पुरानी पेंशन योजना को अब तक फिर से शुरू नहीं किया जा सका। मुख्यमंत्री हालांकि नयी पेंशन योजना को रद्द करने में रुचि रखते हैं और सरकार ने जल्द ही पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है।"उपमुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि अब से कर्नाटक में शिक्षकों को अपने नाम के आगे सम्मानजनक उपसर्ग 'टीआर' का उपयोग करने की अनुमति होगी, ठीक वैसे ही जैसे डॉक्टरों के लिए 'डॉ.' और इंजीनियरों के लिए 'ईआर' का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संबंध में एक आदेश जारी किया है और इसे शिक्षक समुदाय के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया है। श्री परमेश्वर ने छात्रों के भविष्य को संवारने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि मूल्यों को विकसित करने, प्रतिभा की पहचान करने और छात्रों को एक सार्थक भविष्य की ओर मार्गदर्शन करने पर केंद्रित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक की साक्षरता दर 80 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जबकि कई राज्यों ने 95 प्रतिशत से अधिक साक्षरता स्तर हासिल कर लिया है। गरीबी और आर्थिक असमानता हालांकि अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि कर्नाटक में लगभग 70 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा से नीचे श्रेणी में आते हैं।
डॉ. परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार अपने बजट का 11.5 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित कर रही है, जबकि केंद्र सरकार 2.8 प्रतिशत आवंटित करती है। उन्होंने सवाल किया कि पर्याप्त निवेश के बिना देश शैक्षिक प्रगति कैसे हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि देश की इंजीनियरिंग और मेडिकल सीटों में कर्नाटक की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है और यह उच्च शिक्षा चाहने वाले छात्रों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
उच्च शिक्षा मंत्री बसवराज रायरेड्डी ने कहा कि सरकार एक विशेषज्ञ समिति बनाएगी जो इस बात की जांच करेगी कि हर साल सरकारी कोटे के तहत इंजीनियरिंग की 28,000 से 30,000 सीटें क्यों खाली रह जाती हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में सरकारी कोटे की इंजीनियरिंग की 1.29 लाख सीटों में से काफी बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं। उन्होंने कहा कि समिति नौकरी के मौकों और इस ट्रेंड के पीछे के अन्य कारणों की जांच करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) के जरिए पूरी तरह से योग्यता के आधार पर 2,000 कॉलेज व्याख्याताओं की भर्ती करेगी और विश्वविद्यालयों में 1,000 प्रोफेसरों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू करेगी।
स्कूल शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा कि सरकार ने 13,500 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली है, जो कानूनी अड़चनों के कारण रुकी हुई थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा भरी जा रही 72,000 पदों में शिक्षा विभाग की 16,500 पद भी शामिल हैं।
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