बेंगलुरु , अगस्त 26 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार मंत्रिमंडल में छोटे फेरबदल की अटकलों के बीच नयी दिल्ली रवाना होने वाले हैं।
कांग्रेस नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती है जिसमें मंत्रिमंडल में खाली पड़ी एकमात्र सीट को भरना और मंत्री बनने के इच्छुक नेताओं की नाराजगी को संभालना प्रमुख हैं।
हाल ही में हुए कैबिनेट फेरबदल के ठीक बाद शुरू होने वाली इस कवायद ने सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर कौन अंदर, कौन बाहर वाली बहस को फिर से हवा दे दी है। साथ ही इससे मंत्री बी. नागेंद्र के कैबिनेट में बने रहने का विवादित मुद्दा भी फिर से चर्चा में आ सकता है।
इस माहौल में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ श्री शिवकुमार की बैठक अहम मानी जा रही है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी वाल्मीकि कॉर्पोरेशन फंड मामले को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा रही है और श्री नागेंद्र के इस्तीफे की मांग करते हुए एक से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक 200 किलोमीटर की पदयात्रा करने की घोषणा कर चुकी है।
माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान इस बात का आकलन कर रहा है कि क्या श्री नागेंद्र के मंत्री बने रहने से पार्टी को और राजनीतिक नुकसान हो सकता है क्योंकि भाजपा इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रही है।
हालांकि, कैबिनेट में बदलाव का प्रस्तावित प्रयोग सिर्फ़ मंत्री नागेंद्र के मामले तक ही सीमित नहीं है। कैबिनेट में अभी एक पद खाली है, जिसके बारे में आम तौर पर यह उम्मीद की जा रही है कि इसे किसी महिला विधायक से भरा जाएगा क्योंकि मंत्रालय में महिलाओं का प्रतिनिधित्व न होने के कारण इसकी आलोचना हो रही है।
श्री शिवकुमार ने यह भी संकेत दिया है कि कर्नाटक में जल्द ही एक महिला मंत्री होंगी जिससे इस अटकल को और बल मिला है कि खाली पद जल्द ही भरा जा सकता है।
साथ ही, कांग्रेस के कई विधायक मंत्री पद पाने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं जिससे यह सीमित कवायद भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गई है। पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय, जातीय और लैंगिक प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाना चाहता है, साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहता है कि जिन लोगों को जगह नहीं मिलती, उनमें कोई नया असंतोष न पनपे।
इसलिए संगठन या मंत्रिमंडल में मामूली फेरबदल की संभावना ने सत्ताधारी पार्टी में काफी दिलचस्पी पैदा कर दी है। उम्मीद है कि नए मंत्री को शामिल करने और काउंसिल के मौजूदा सदस्यों से जुड़े किसी भी बदलाव में पार्टी आलाकमान की अहम भूमिका होगी।
श्री शिवकुमार का दिल्ली दौरा अहम है क्योंकि कांग्रेस इन अलग-अलग मांगों को संभालने की कोशिश कर रही है, साथ ही वह यह भी देख रही है कि वाल्मीकि कॉर्पोरेशन मामले पर भाजपा का अभियान और ज़्यादा राजनीतिक ज़ोर न पकड़ ले।
इस तरह, मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह एक महिला विधायक को प्रतिनिधित्व देने और मंत्री बनने के इच्छुक लोगों को जगह देने के बीच संतुलन बनाए रखें, साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि कैबिनेट में किसी भी बदलाव से कांग्रेस के भीतर असंतोष का कोई नया मोर्चा न खुले।
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