बेंगलुरु , जुलाई 14 -- कर्नाटक के राजकीय गीत 'जय भारत जननीय तनुजते' को अपनाये जाने के बाद से इसमें अब तक का सबसे बड़ा संशोधन हो सकता है, क्योंकि सरकार की ओर से गठित एक समिति ने इसमें बौद्ध धर्म का संदर्भ शामिल करने की सिफारिश की है।

कन्नड़ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रोफेसर पुरुषोत्तम बिल्लीमले की अध्यक्षता वाली समिति ने कर्नाटक सरकार को सौंपी अपनी सिफारिश में जैन धर्म के मौजूदा संदर्भ में संशोधन करके बौद्ध धर्म को भी स्पष्ट रूप से शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।

समिति ने 'जैनर पूज्य उद्यान' पंक्ति में बदलाव करके बौद्ध धर्म को शामिल करने का सुझाव दिया है। समिति का तर्क है कि कर्नाटक में बौद्ध धर्म की गहरी ऐतिहासिक जड़ें होने के बावजूद मूल राज्य गीत में इसका सीधा उल्लेख नहीं है। समिति ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन राज्य में बौद्ध धर्म के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है और इसका उद्देश्य कर्नाटक के सबसे पूजनीय सांस्कृतिक प्रतीकों में से एक में अधिक धार्मिक समावेशिता सुनिश्चित करना है।

यह प्रस्ताव कर्नाटक की सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत में सभी प्रमुख धर्मों के योगदान को मान्यता देने के नए प्रयासों के बीच आया है। समिति का मानना है कि राज्य गीत में यह सुधार करने से कवि कुवेम्पु की रचना की मूल भावना को सुरक्षित रखते हुए राज्य की विविध धार्मिक परंपराओं को बेहतर ढंग से दर्शाया जा सकेगा।

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