बेंगलुरु , मई 25 -- कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को कांग्रेस आलाकमान ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में होने वाली बैठक के लिए तलब किया है, जिससे राज्य की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गयी है।

मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करने की संभावना है।

श्री सिद्दारमैया ने सोमवार को इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें दिल्ली में चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया है, हालांकि बैठक के एजेंडे की उन्हें जानकारी नहीं है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मुझे दिल्ली बुलाया गया है। कल सुबह 11 बजे बैठक है। विषय क्या है, यह मुझे नहीं पता लेकिन मुझे आमंत्रित किया गया है। कल रात के.सी. वेणुगोपाल ने फोन कर बैठक की तारीख और समय की जानकारी दी।"पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, जिनमें आगामी राज्यसभा चुनाव की तैयारियां प्रमुख हैं। कर्नाटक से राज्यसभा की चार सीटें रिक्त होने वाली हैं और कांग्रेस तीन सीटें जीतने की रणनीति पर काम कर रही है।

यह प्रस्तावित बैठक ऐसे समय में हो रही है जब कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच नेतृत्व संतुलन को लेकर लंबे समय से जारी खींचतान बनी हुई है। सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के बावजूद सत्ता साझेदारी, मंत्रिमंडल फेरबदल और प्रशासनिक दिशा को लेकर सवाल बने हुए हैं।

बैठक के एजेंडे का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है, हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य सरकार के भीतर नेतृत्व समीकरण और आपसी समन्वय पर स्पष्टता लाने की कोशिश कर सकता है। पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन, उत्तराधिकार की योजना और जातीय संतुलन जैसे मुद्दों को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं, जिससे यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान राज्य इकाई की दीर्घकालिक राजनीतिक संरचना के साथ-साथ तत्काल संगठनात्मक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श कर सकता है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, "चर्चा का मुख्य उद्देश्य नेतृत्व को लेकर स्पष्टता लाना और शासन में स्थिरता सुनिश्चित करना होगा।"इस बैठक की खबर के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर फिर तेज हो गया है, हालांकि श्री सिद्दारमैया और श्री शिवकुमार दोनों ही यह कह चुके हैं कि वे कांग्रेस आलाकमान के निर्णय का पालन करेंगे।

जो व्यवस्था पहले दो नेताओं के बीच संतुलन मानी जा रही थी, अब वह कई दावेदारों और क्षेत्रीय समीकरणों से जुड़ी व्यापक प्रतिस्पर्धा के रूप में देखी जा रही है। मंत्रिमंडल विस्तार में देरी और केंद्रीय नेतृत्व की कथित अनिर्णय की स्थिति ने भी असमंजस को बढ़ाया है।

पार्टी के भीतर यह स्वीकार किया जा रहा है कि कांग्रेस की दक्षिण भारत रणनीति में कर्नाटक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और ऐसे में राज्य सरकार में स्थिरता राजनीतिक रूप से जरूरी मानी जा रही है।

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