बेंगलुरु , अगस्त 26 -- कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने बुधवार को अपने इस्तीफे पर किसी भी चर्चा की खबरों को खारिज कर करते हुए कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कार्यालय से कोई फोन नहीं आया है और इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है।
श्री नागेन्द्र ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई फोन नहीं आया है और मेरे इस्तीफे के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई है।"मंत्री का यह स्पष्टीकरण कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से कथित तौर पर धन के दुरुपयोग और अवैध हस्तांतरण को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी की मांग के बीच आया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने श्री नागेंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है और इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बना रही है, वहीं राज्य सरकार को भी मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगने वाले राज्यपाल के पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया को लेकर सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक अनिश्चितता के बीच ऐसी खबरें सामने आयी हैं कि श्री नागेंद्र ने खुद इस्तीफा देने की इच्छा जतायी है और राज्य के घटनाक्रमों के बारे में मुख्यमंत्री शिवकुमार से फोन पर लगभग 15 मिनट तक बात की है।
श्री नागेंद्र ने हालांकि सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी भी चर्चा की खबरों को खारिज कर दिया, जबकि उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गयी हैं।
ये घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि विपक्षी दल वाल्मीकि निगम मामले को लेकर संयुक्त आंदोलन और पदयात्रा की तैयारी कर रहे हैं। बढ़ते दबाव ने सरकार और आगामी चुनावों पर इस विवाद के संभावित राजनीतिक असर को लेकर भी सवाल खड़े कर दिये हैं।
सीबीआई ने पहले ही राज्यपाल को पत्र लिखकर वाल्मीकि निगम के धन के कथित दुरुपयोग और हस्तांतरण के सिलसिले में श्री नागेंद्र पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी है।
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