हैदराबाद , अक्टूबर 23 -- कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. एमए सलीम ने शुक्रवार को बंजारा हिल्स स्थित एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय पुलिस समन्वय समिति (एसआरपीसीसी) की बैठक में राज्य की कम्युनिटी पुलिसिंग पहलों, साइबर अपराध की जांच, नशा मुक्ति प्रयासों और तकनीक-आधारित यातायात प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।

डीजीपी ने कहा कि प्रभावी पुलिसिंग के लिए जनता का भरोसा और विश्वास बहुत जरूरी है। कर्नाटक की माना-माने पुलिस पहल के तहत पुलिस ने पूरे राज्य में घर-घर जाकर जानकारी जुटाई है और संबंधित पुलिसकर्मियों के संपर्क विवरण लोगों को दिए हैं, ताकि वे जरूरत पड़ने पर आसानी से मदद मांग सकें। लगभग 55,000 ऐसे परिवारों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय किए गए हैं, जिन्हें अधिक खतरा हो सकता है-खासकर वे घर जहां बुजुर्ग अकेले रहते हैं।

उन्होंने बताया कि जनता की शिकायतों, यातायात से जुड़ी समस्याओं और अनुसूचित जाति (एससी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों की चिंताओं को दूर करने के लिए तय शनिवार को पुलिस-जनता बैठकें आयोजित की जाती हैं। राज्य सरकार पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण भी अपना रही है, ताकि अपराध के शिकार लोगों को जांच और कानूनी कार्यवाही के दौरान लगातार मदद मिलती रहे। नशामुक्ति पहल के तहत कर्नाटक ने लगभग 8,000 नशा करने वाले लोगों की पहचान की है। पुलिसकर्मियों को उनकी पुनर्वास प्रक्रिया, सामाजिक व्यवहार और आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि वे दोबारा नशे की लत में न पड़ें।

राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समितियों के साथ मिलकर ऐसे अभियान भी चला रही है, जिनका मकसद नशीले पदार्थों की मांग और आपूर्ति दोनों को रोकना है। श्री सलीम ने क्षमता निर्माण के उपायों के बारे में बताया कि कर्नाटक ने सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के जरिए लगभग 69,000 पुलिसकर्मियों और अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारियों को साइबर अपराध की जांच के लिए प्रशिक्षित किया है। न्यायिक अधिकारियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे डिजिटल साक्ष्यों और साइबर अपराध के मामलों को बेहतर ढंग से समझ सकें। जांच क्षमताओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने जांच नियमावली और शोध सामग्री भी प्रकाशित की है।

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