बेलगावी , अक्टूबर 28 -- कर्नाटक के किसानों ने गन्ने का समर्थन मूल्य 5,500 रुपये प्रति टन करने और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर अपना आंदोलन तेज कर दिया है।

बेलगावी जिले के गुरलापुर में किसानों का प्रदर्शन बुधवार को लगातार चौथे दिन में प्रवेश कर गया। धरने पर बैठे किसानों ने मांगें न पूरी होने पर राज्य भर की चीनी मिलों के गोदामों में ताला लगाने और चीनी का उठान रोकने की सीधी चेतावनी दी है। किसान अपनी आगे की रणनीति तय करने की तैयारी में हैं। .कर्नाटक राज्य रैत संघ और हसीरू सेना के प्रदेश अध्यक्ष चन्नप्पा पूजेरी ने गन्ने की कीमत के विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र और चीनी मिलों पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य भर के किसानों से प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है। विवाद के केंद्र में चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में वृद्धि की मांग है। किसानों का तर्क है कि इससे मिलों की कमाई बढ़ेगी और वे किसानों को प्रति टन गन्ने के लिए 5,500 रुपये का भुगतान करने में सक्षम होंगे।

श्री पूजेरी ने 29 अक्टूबर से कर्नाटक का दौरा करने वाली केंद्रीय समिति से जमीनी स्थिति का जायजा लेने और किसानों की समस्याएं सुनने के लिए अपने यात्रा कार्यक्रम में इस जिले को भी शामिल करने का आग्रह किया।

श्री पूजेरी ने केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी से चीनी मिल प्रबंधनों के साथ बैठक बुलाने और यह आश्वासन देने का आग्रह किया कि चीनी की कीमत 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे नहीं जायेगी। वैश्विक स्तर पर चीनी की कमी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसका फायदा घरेलू कीमतों को मिलना चाहिए और किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए मिलों की बेहतर कमाई जरूरी है।

विवाद को और भड़काने वाली चेतावनी देते हुए श्री पूजेरी ने कहा कि यदि प्रस्तावित तालाबंदी अभियान के बाद चीनी मिलों ने रात में अपने गोदामों से चीनी का स्टॉक बाहर निकालने की कोशिश की तो किसी भी अप्रिय घटना के लिए मिल प्रबंधन खुद जिम्मेदार होगा।

गन्ना किसान अपनी फसल की कीमत को मिलों द्वारा चीनी बेचने की दर से जोड़ रहे हैं, जिससे किसानों और चीनी मिलों के बीच समझौता कराने के लिए राज्य और केंद्र सरकार पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है।

प्रस्तावित कार्रवाई से यह विवाद गुरलापुर के विरोध प्रदर्शन से आगे बढ़ने के आसार हैं, हालांकि गोदामों में तालाबंदी अभियान के समय और राज्यव्यापी दायरे की औपचारिक घोषणा होना बाकी है।

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