बेलगावी , नवंबर 02 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद बसवराज बोम्मई ने कर्नाटक में आंदोलन कर रहे गन्ना किसानों को भरोसा दिलाया है कि वह केंद्र की चीनी मूल्य निर्धारण समिति से संपर्क करेंगे और किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक अंतरिम वित्तीय राहत पैकेज की मांग करेंगे, ताकि चीनी मिलों में गन्ने की पेराई का काम शुरू हो सके।
श्री बोम्मई ने बताया कि उन्होंने रमेश चंद की अध्यक्षता वाली चीनी मूल्य निर्धारण समिति से मिलने का समय मांगा है। दिल्ली में समिति के सदस्यों से मुलाकात के दौरान वह किसानों के लिए अंतरिम राहत की मांग करते हुए एक पत्र सौंपेंगे। साथ ही, वह केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से भी आग्रह करेंगे कि वह प्रस्तावित राहत फॉर्मूले को स्वीकार कर लें।
उन्होंने यह आश्वासन तब दिया, जब रविवार को हावेरी में 'राज्योत्सव' कार्यक्रम के बाद किसानों ने उनसे मुलाकात की और गन्ने के दाम को लेकर चल रहे आंदोलन में हस्तक्षेप करने की मांग की।
यह मानते हुए कि केंद्र सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) और गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तय करती है, श्री बोम्मई ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाने चाहिए कि चीनी मिलें भी किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दें।
उन्होंने इस विवाद को सुलझाने और चीनी उद्योग में आगे किसी भी तरह की रुकावट को रोकने के लिए किसान संगठनों, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वित प्रयासों का आह्वान किया।
खबरों के अनुसार, 'कर्नाटक राज्य रैथा संघ' के सदस्यों ने श्री बोम्मई को उनकी गाड़ी में बैठने से रोक दिया और उनसे मांग की कि वे केंद्र सरकार के समक्ष चीनी के एमएसपी में संशोधन का मुद्दा उठाएं।
किसानों ने सांसद से कहा कि वे अब अपनी मांगों को लेकर सीधे केंद्र सरकार के पास जा रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि वे संसद में भी इस मुद्दे को उठाएंगे। प्रदर्शनकारियों में से एक ने यह भी मांग की कि जब तक चीनी और गन्ने के मूल्यों में संशोधन नहीं हो जाता, तब तक चीनी मिलों को पेराई (क्रशिंग) शुरू करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
श्री बोम्मई ने कहा कि वह उपायुक्त से किसानों की मांग की जांच करने के लिए कहेंगे। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि वह उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए व्यक्तिगत रूप से संभावित उपायों पर विचार करेंगे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पूरे कर्नाटक में अपनी उपज के लिए बेहतर दाम की मांग को लेकर गन्ना किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। गन्ने के दाम को लेकर जारी गतिरोध के कारण चीनी मिलों के पेराई कार्यों पर भी दबाव बढ़ गया है।
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