बेंगलुरु , मई 29 -- कर्नाटक कांग्रेस कैबिनेट में बड़े फेरबदल पर विचार कर रही है। इसके तहत लगभग 50 प्रतिशत नये चेहरों को शामिल किये जाने की संभावना है। राज्य सरकार में चल रहे नेतृत्व परिवर्तन के बीच पार्टी नेतृत्व शनिवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की एक महत्वपूर्ण बैठक की तैयारी कर रहा है।

कर्नाटक विधान परिषद के मुख्य सचेतक सलीम अहमद ने शुक्रवार को कहा कि कैबिनेट के गठन, क्षेत्रीय एवं सामाजिक (जातीय) प्रतिनिधित्व और संभावित उप-मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति के संबंध में अंतिम निर्णय सीएलपी बैठक के बाद कांग्रेस आलाकमान की ओर से लिया जायेगा।

नयी दिल्ली में श्री अहमद ने कहा कि पार्टी नेतृत्व सामूहिक रूप से यह तय करेगा कि कितने मंत्रियों को पद पर बनाये रखा जाए और कैबिनेट में कितने नये चेहरों को शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा, "सीएलपी की बैठक के बाद मंत्रियों की नियुक्ति, विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व तथा नये मंत्रियों को शामिल करने पर निर्णय लिये जायेंगे। इस पर अंतिम फैसला आलाकमान और मुख्यमंत्री का होगा।"श्री अहमद ने बताया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला इस बैठक में शामिल होंगे, जहां मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा होने की भी उम्मीद है। इसके बाद शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय होने की संभावना है।

यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के बाद अपना इस्तीफा सौंपने के एक दिन बाद सामने आया है। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

श्री अहमद ने कहा कि श्री सिद्दारमैया ने नयी दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की और पिछले कुछ वर्षों में उन्हें दिये गये अवसरों के लिए नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

श्री अहमद ने कहा, "उन्होंने मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता के रूप में सेवा करने सहित अन्य जिम्मेदारियां सौंपने के लिए कांग्रेस नेतृत्व का शुक्रिया अदा किया और उनके साथ भविष्य की रणनीति पर चर्चा की।"वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत देते हुए श्री अहमद ने कहा कि पार्टी 'कामराज योजना' की तर्ज पर पुनर्गठन करने का इरादा रखती है। इसके तहत प्रशासनिक अनुभव रखने वाले वरिष्ठ मंत्रियों को संगठनात्मक भूमिकाओं में भेजा जायेगा, जबकि युवा और नये नेताओं को शासन में लाया जायेगा।

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