बेंगलुरु , अप्रैल 08 -- कर्नाटक में भाषाई प्राथमिकताओं पर जारी बहस के बीच हालिया आंकड़ों के अनुसार राज्य बोर्ड के तहत भारी संख्या में छात्राें ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में चुना है। वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में लगभग 8.1 लाख में से 7.5 लाख से अधिक छात्रों ने हिंदी का चयन किया है, जो कुल छात्रों का लगभग 93 प्रतिशत है।

इसके अतिरिक्त आदर्श विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के माध्यम से 4,778 छात्र हिंदी पढ़ रहे हैं, जिससे हिंदी सीखने वालों की कुल संख्या लगभग 7.6 लाख हो गयी है। इसकी तुलना में, अन्य भाषाओं का चयन काफी कम रहा है। राज्य की भाषा कन्नड़ को 11,483 छात्रों ने चुना है, जबकि 32,135 छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी को चुना है। अन्य विकल्पों में उर्दू, संस्कृत और अरबी में क्रमशः 5,544, 5,159 और 361 छात्र दर्ज किये गये हैं। तुलु, कोंकणी और मराठी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में छात्रों की संख्या बहुत कम रही है।

यह रुझान कर्नाटक सरकार के पेश किए गए नीतिगत बदलाव की पृष्ठभूमि में आया है। कर्नाटक के विद्यालय शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने इस नीति की घोषणा करते हुए बताया कि तीसरी भाषा को अब एसएसएलसी स्तर पर अंतिम कुल अंकों में नहीं जोड़ा जायेगा। इसके बजाय, छात्रों को ए, बी, सी और डी जैसे ग्रेड दिये जायेंगे।

इससे पहले, कुल 625 अंकों में से तीसरी भाषा के 100 अंक होते थे। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का सुझाव है कि संशोधित मूल्यांकन प्रणाली ने छात्रों की पसंद को प्रभावित किया होगा, क्योंकि अब तीसरी भाषा के अंक नहीं बल्कि ग्रेड दिए जाते हैं। शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों के अनुसार, हिंदी को छात्रों के बीच व्यापक रूप से उपयोग किये जाने वाले और व्यावहारिक विकल्प के रूप में देखा जाना जारी है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित