बेंगलुरु , अक्टूबर 02 -- कर्नाटक में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक विवाद शुक्रवार को और तेज हो गया।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 आवेदनों के कथित दुरुपयोग को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाये। यह नया टकराव श्री शिवकुमार द्वारा गुरुवार को मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना देने के बाद सामने आया। उन्होंने फॉर्म-7 आवेदनों को बड़ी संख्या में दाखिल किए जाने के कथित मामले में कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य के निर्वाचन अधिकारियों को शिकायतों का सत्यापन करने और जानबूझकर झूठे दावे या आपत्तियां दाखिल करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया।
श्री विजयेंद्र ने शुक्रवार को शिवकुमार के प्रदर्शन को 'ढोंग' करार दिया और मुख्यमंत्री के उस आरोप पर सवाल उठाया कि भाजपा फॉर्म-7 आवेदनों के जरिए अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में करीब 24,000-25,000 फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए गए हैं, लेकिन ये आवेदन केवल भाजपा कार्यकर्ताओं ने ही दाखिल नहीं किये हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस के बूथ स्तर के एजेंटों, अन्य राजनीतिक दलों के सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी ऐसे आवेदन दाखिल किए हैं।
श्री विजयेंद्र ने सवाल किया कि कोई राजनीतिक दल सीधे मतदाता सूची से नाम कैसे हटा सकता है। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 के तहत दाखिल आवेदनों की जांच निर्वाचन अधिकारियों, जिसमें बूथ लेवल अधिकारी और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी शामिल हैं, द्वारा की जाती है।
उन्होंने श्री शिवकुमार को अपने इस आरोप को साबित करने की चुनौती दी कि भाजपा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से विशेष रूप से अल्पसंख्यक, दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के 5,000 से 10,000 मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास कर रही है,इस बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मतदाता सूचियों में अनियमितताओं के आरोप लगाये। उन्होंने मैसूरु की नरसिम्हाराजा विधानसभा सीट का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पिछले दो चुनावों के दौरान यहां मतदाताओं की संख्या करीब 1.30 लाख बढ़ गयी है। उन्होंने बेंगलुरु के शांतिनगर और शिवाजीनगर, कलबुर्गी दक्षिण तथा दक्षिण कन्नड़ के कुछ हिस्सों में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष रूप से अधिक अल्पसंख्यक आबादी वाले विधानसभा क्षेत्रों का उल्लेख किया।
श्री विजयेंद्र ने दावा किया कि भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अनिल थॉमस ने ऐसे मामलों की पहचान की है, जिनमें अन्य विधानसभा क्षेत्रों और राज्यों के लोगों ने एसआईआर प्रक्रिया में हिस्सा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नाम एक से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में भी दर्ज हैं।
वहीं, श्री शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के अपने बयान ही उसकी 'रणनीति, साजिश और योजनाओं' को उजागर कर रहे हैं।
श्री विजयेंद्र द्वारा करीब 24,000 फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जाने के उल्लेख पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आंकड़े की भी जांच की जरूरत है। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि यह पूरी तरह सच है या गलत। कम से कम इसका एक हिस्सा सच है।" उन्होंने कहा कि यदि तीन दलों द्वारा सामूहिक रूप से 24,000 आवेदन दाखिल किए गए हैं, तो "इसके पीछे निश्चित रूप से कुछ सोच है।"उन्होंने कहा कि वह विजयेंद्र की चुनौती स्वीकार करने के लिए तैयार हैं और कहा, "आइए, इस चुनौती को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले चलते हैं।" श्री शिवकुमार ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए अल्पसंख्यकों, गरीबों और दलितों के वोट हटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिन्होंने फॉर्म जमा करने की बात स्वीकार की है।
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