बेंगलुरु , अप्रैल 09 -- कुछ सुबहें ऐसी होती हैं जब चुनाव जानी-पहचानी शक्ल में आते हैं। कतारें, उंगलियों पर लगी स्याही और प्रशासनिक कुशलता की धीमी गूंज और फिर कुछ सुबहें ऐसी भी होती हैं जब कुछ अप्रत्याशित घट जाता है जो सारी सुर्खियां बटोर ले जाता है।
कर्नाटक के बागलकोट में गुरुवार को एक भेड़ जो पार्टी के झंडों से सजी हुई थी कांग्रेस उम्मीदवार उमेश मेती के साथ फ्रेम में आ गयी। इसने वोट डालने के एक सामान्य से काम को एक ऐसे यादगार पल में बदल दिया, जिसकी छाप बैलेट पेपर से भी कहीं ज़्यादा देर तक बनी रही। मेती का यह शांत और लगभग देहाती अंदाज़ जो उनकी गड़रिया समुदाय की जड़ों से जुड़ा था और यह मतदान केंद्र की औपचारिक और बनावटी व्यवस्था के बिल्कुल विपरीत था।
यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि एक सहज प्रवृत्ति थी। फिर भी यह एक ऐसा तमाशा बन गया जो सरकारी बुलेटिनों से भी ज़्यादा तेज़ी से फैला, और चुनाव के दिन की दृश्य-स्मृति में हमेशा के लिए बस गया। स्याही सूख जाने के बहुत बाद तक भी, ऐसी तस्वीरें चुनावी आंकड़ों से कहीं ज़्यादा समय तक लोगों के ज़ेहन में ज़िंदा रहती हैं।
कर्नाटक में वोटिंग की प्रक्रिया काफी अनुशासित तरीके से आगे बढ़ी। दोनों ही निर्वाचन क्षेत्रों में सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ और सुरक्षाकर्मियों तथा प्रशासनिक कर्मचारियों की कड़ी निगरानी में बिना किसी रुकावट के चलती रही। शुरुआत में लोगों ने काफी उत्साह से हिस्सा लिया, और पहले चार घंटों के भीतर ही वोटिंग 20 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गई। खास तौर पर बागलकोट में, दावणगेरे दक्षिण की तुलना में वोटरों का आना-जाना ज़्यादा लगा रहा।
दावणगेरे दक्षिण में वोटिंग की गति थोड़ी धीमी ज़रूर थी, लेकिन उसमें एकरूपता बनी रही। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया था कि इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को संचालित करने वाली व्यवस्था बिना किसी रूकावट के साथ काम करे। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में 2,500 से ज़्यादा कर्मचारियों को तैनात किया गया था, और उनका मुख्य ज़ोर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के बजाय व्यवस्था बनाए रखने पर था। संवेदनशील इलाकों में खासकर दावणगेरे दक्षिण में मतदान केंद्रों के आस-पास के क्षेत्रों में किसी भी तरह की अशांति को रोकने और वोटरों के लिए शांत माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से निषेधाज्ञा लागू की गयी थी।
बागलकोट में, जहाँ नौ उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, 332 मतदान केंद्रों पर वोटिंग हो रही है, और यहाँ 2.5 लाख से ज़्यादा वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। दावणगेरे दक्षिण में उम्मीदवारों की संख्या ज़्यादा है। यहाँ 25 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं और यहाँ 284 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से कई स्टेशनों को संवेदनशील घोषित किया गया है, जिसके चलते पूरे दिन कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता पड़ी।
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