बेंगलुरु , अप्रैल 21 -- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने माध्यमिक स्कूल प्रमाणपत्र (एसएसएलसी) परीक्षा की मूल्यांकन प्रणाली में सरकार के किए बदलावों पर रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय इसे "खेल के बीच में ही नियम बदलने" जैसा बताया और कहा कि जब परीक्षाएं आयोजित की गईं, तब इन नियमों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया, इसलिए इन्हें पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता है।
'कर्नाटक राज्य बनाम सहाना आर. नायक' मामले में राज्य की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ई.एस. दीरेश ने अपने उस पुराने आदेश पर फिर से विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें नयी प्रणाली के कार्यान्वयन पर रोक लगाई गई थी। न्यायालय ने कहा कि परीक्षा के बाद नियम बदलना निष्पक्षता के खिलाफ होगा और यह छात्रों के परीक्षा देने के बाद परीक्षा ढांचे में बदलाव करने के समान होगा।
इस विवाद के केंद्र में एक संशोधित मूल्यांकन ढांचा था। इसमें वर्ष 2025-26 की एसएसएलसी परीक्षाओं में तीसरी भाषा के अंकों के निर्धारण के तरीके को बदलने की मांग की गई थी। नई प्रणाली के तहत इस विषय को अलग से ग्रेड देने और इसे एसएसएलसी के कुल अंकों की गणना से बाहर रखने का प्रस्ताव था। राज्य सरकार का तर्क था कि इस कदम का उद्देश्य छात्रों पर दबाव कम करना और फेल होने की दर को घटाना है।
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