बेंगलुरु , जुलाई 13 -- कर्नाटक कैबिनेट विस्तार को लेकर महीनों से बना राजनीतिक सस्पेंस खत्म करते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को संकेत दिया कि छह अगस्त से शुरू हो रहे राज्य विधायिका के मानसून सत्र से पहले यह प्रक्रिया पूरी हो जायेगी। इसके लिए नयी दिल्ली दौरे के बाद कांग्रेस आलाकमान से निर्णायक हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।
उपमुख्यमंत्री का यह बयान अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस नेतृत्व इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसने मंत्री पद के आकांक्षी सत्ताधारी दल के विधायकों के बीच लॉबिंग, अटकलों और बेसब्री को बढ़ा दिया था।
श्री शिवकुमार ने अपने सरकारी आवास 'कृष्णा' पर पत्रकारों से कहा, "विधानमंडल का सत्र छह अगस्त से बुलाया गया है। मैं आधिकारिक काम से दिल्ली जाऊंगा। हमारे नेता तीन-चार दिनों के भीतर तारीख तय करेंगे। सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार पूरा हो जायेगा।" उनकी यह टिप्पणी मंत्रिमंडल में शामिल होने की उम्मीद लगाये बैठे कांग्रेस विधायकों के लगातार दबाव और सरकार में क्षेत्रीय, जातीय व गुटीय समीकरणों को साधने को लेकर पार्टी के भीतर जारी गहन विचार-विमर्श की रिपोर्टों के बीच आयी है।
पार्टी सूत्रों को उम्मीद है कि श्री शिवकुमार नयी दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के साथ अहम चर्चा करेंगे, जहां कैबिनेट विस्तार की अंतिम रूपरेखा को मंजूरी मिलने की संभावना है। कावेरी जल बंटवारे के विवादास्पद मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक अदालती निर्देशों का सम्मान करते हुए अपने किसानों के हितों की मजबूती से रक्षा करेगा।
उन्होंने कहा, "हमारी सबसे पहली जिम्मेदारी किसानों की रक्षा करना और पीने का पानी सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही हमें तमिलनाडु को पानी छोड़ने के संबंध में अदालत के निर्देशों का भी पालन करना होगा। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक 15 जुलाई को होगी, जहां कर्नाटक मजबूती से अपना पक्ष रखेगा। इसके बाद सरकार के फैसले की घोषणा की जायेगी।"मंड्या और श्रीरंगपटनम सहित कावेरी बेसिन के विधायकों के ज्ञापनों का जिक्र करते हुए श्री शिवकुमार ने कहा कि उनकी चिंताओं से सरकार को अवगत करा दिया गया है और प्राधिकरण के विचार-विमर्श के बाद फैसले की जानकारी दी जायेगी।
कर्नाटक लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार के निलंबन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल ने आदेश जारी किया था और सरकार ने निर्देश दिया है कि अगली व्यवस्था होने तक आयोग के सबसे वरिष्ठ सदस्य जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
श्री शिवकुमार ने यह भी घोषणा की कि तिरुमला मंदिर में राज्य के प्रतिनिधियों के पहली आरती प्राप्त करने की सदियों पुरानी परंपरा को कर्नाटक आगे बढ़ायेगा।
उन्होंने कहा, "यह मैसूर के महाराजाओं के दिनों से कर्नाटक को मिला ऐतिहासिक विशेषाधिकार है। कर्नाटक के जनप्रतिनिधि, न्यायाधीश, अधिकारी, सांसद, महापौर, तहसीलदार और अन्य योग्य गणमान्य व्यक्ति निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार इस अवसर का लाभ उठा सकेंगे। यह किसी विशेष राजनीतिक दल के लिए आरक्षित नहीं है और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के नियम लागू रहेंगे।"पूर्व राज्यसभा सदस्य एच हनुमंतप्पा को श्रद्धांजलि देते हुए श्री शिवकुमार ने उन्हें कांग्रेस का बड़ा नेता और सांसद बताया, जिन्होंने कर्नाटक और देश दोनों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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