नयी दिल्ली , जून 02 -- केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड (केएमवीएसटीडीसीएल) के धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित मामले में चार आरोपपत्र दाखिल किये हैं।

सीबीआई ने मंगलवार को कहा कि जांच पूरी हो चुकी है। एजेंसी ने केएमवीएसटीडीसीएल, अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग और कर्नाटक जर्मन प्रौद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (केजीटीटीआई) के खिलाफ तीन अलग-अलग आरोपपत्र दायर किये हैं।

सीबीआई ने कहा कि कर्नाटक के पूर्व अनुसूचित जनजाति मंत्री बी नागेंद्र को तीनों आरोपपत्रों में आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई इकाइयों में फैली इस साजिश में मुख्य भूमिका निभाई।

यह मामला पहले यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ओर से दायर की गयी एक शिकायत के आधार पर सूचीबद्ध किया गया था। उस शिकायत में बैंक की महात्मा गांधी मार्ग शाखा के तीन अधिकारियों एवं अन्य बेनाम व्यक्तियों के नाम दिये गये थे। जांच को कर्नाटक उच्च न्यायालय की देखरेख में अंजाम दिया गया।

सीबीआई की इसी जांच में अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग और केजीटीटीआई के संबंधित कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक जुलाई 2025 को जांच का दायरा बढ़ाकर इन दोनों इकाइयों को भी इसमें शामिल करने का आदेश दिया।

एजेंसी के अनुसार, जांच में श्री नागेंद्र, उनके करीबी सहयोगी नेक्कंती नागराज, केएमवीएसटीडीसीएल के प्रबंध निदेशक पद्मनाभ जे. जी. और हैदराबाद स्थित व्यवसायी सत्यनारायण वर्मा की कथित साजिश का पता चला।

सीबीआई ने आरोप लगाया कि काल्पनिक व्यावसायिक संस्थाओं के नाम पर 18 बैंक खाते खोलने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, और जाली हस्ताक्षरों तथा मनगढ़ंत सरकारी मुहरों का उपयोग करके धोखाधड़ी वाले लेन-देन किये गये।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि केएमवीएसटीडीसीएल के यूनियन बैंक खाते में लगभग 187 करोड़ रुपये जमा किये गये थे, जिसमें से 89.63 करोड़ रुपये जाली चेक और आरटीजीएस लेन-देन के ज़रिए धोखाधड़ी करके निकाल लिये गये। आरोप है कि इन पैसों को नकद, बुलियन और महंगी गाड़ियों में बदलने से पहले, लगभग 600 बैंक खातों के ज़रिये घुमाया गया था।

सीबीआई ने आरोप लगाया कि कुछ बैंक अधिकारियों ने बैंकिंग नियमों का उल्लंघन करते हुए इन लेन-देनों में मदद की। उसने यह भी दावा किया कि गलत तरीके से इस्तेमाल किये गये पैसों से खरीदा गया एक वाहन पूर्व मंत्री से जुड़ा हुआ था, जबकि कथित धोखाधड़ी से मिले पैसों का कुछ हिस्सा नागराज के सहयोगियों और रिश्तेदारों के ज़रिए आगे भेजा गया था।

जांच के एक अलग पहलू में, एजेंसी ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने स्मार्ट कंप्यूटर लैब और रोटी बनाने वाली मशीनों के लिए 13.95 करोड़ रुपये के टेंडर बेंगलुरु की एक ऐसी कंपनी को दिये, जिसका संबंध श्री नागराज से था। सीबीआई ने दावा किया कि 1.20 करोड़ रुपये की अवैध रकम पूर्व मंत्री के रिश्तेदारों, सहयोगियों और अन्य व्यक्तियों से जुड़े खातों के ज़रिये भेजी गयी थी।

जांच में केजीटीटीआई को दिये गये 4.90 करोड़ रुपये की कौशल विकास प्रशिक्षण परियोजना की भी जांच की गयी। सीबीआई के अनुसार, बाद में यह काम बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के कई संस्थाओं को सब-कॉन्ट्रैक्ट पर दे दिया गया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस परियोजना के सिलसिले में श्री नागराज के परिवार के सदस्यों और राज्य सरकार के एक अधिकारी को गैर-कानूनी भुगतान किये गये।

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