बेंगलुरु , जनवरी 30 -- कर्नाटक में ठेकेदार करीब 38,000 करोड़ रुपये की राशि बकाया रहने को लेकर पूरे राज्य में काम रोकने और हड़ताल करने की धमकी दे रहे हैं, जबकि नेता इस देरी के लिए एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में लगे हुए हैं।
कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ के अध्यक्ष मंजूनाथ ने शुक्रवार को कहा कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से बार-बार अपील के बावजूद कई मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। उन्होंने चिक्काबल्लापुर के ठेकेदार मुनेगौड़ा के चिंताजनक मामले पर भी जोर दिया, जिन्होंने पैसों की तंगी का हवाला देकर आत्महत्या की कोशिश की थी।
उन्होंने कहा, "हमने ठेकेदारों के बकाये के लिए अलग-अलग विभाग और मंत्रियों से कई बार आग्रह किया। सरकार हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। हम मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि वे तुरंत ठेकेदारों की बैठक बुलाएं। अगर हमारी समस्याएं हल नहीं हुईं तो फरवरी से काम ठप कर दिया जायेगा। हमने 5 मार्च को हड़ताल करने की योजना भी बनायी है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी लिखा है।"दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा कि बकाया बिल पिछली भाजपा सरकार ने छोड़े थे। कर्नाटक के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि 38,000 करोड़ रुपये में से 20,000 करोड़ रुपये भाजपा के समय में आये, जबकि बाकी मौजूदा सरकार के समय के हैं।
यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है। राज्य भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार ने भुगतान में देरी करके और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर कर्नाटक को एक 'एटीएम' बना दिया है, हालांकि सत्ताधारी दल ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित