हुबली, अक्टूबर 15 -- केंद्र सरकार से आश्वासन मिलने के बावजूद पीछे हटने से इनकार करते हुए कर्नाटक के गन्ना किसानों ने गुरुवार को हुबली की ओर अपनी पदयात्रा जारी रखी। ये किसान गन्ने के दाम, चीनी के मूल्य और चीनी मिलों में कथित अनियमितताओं से जुड़ी अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किसान केंद्र और राज्य सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं।

यह आंदोलन कर्नाटक राज्य रैत संघ और हसीरू सेना के चुनप्पा पुजारी और किसान नेता शशिकांत पडसलागी के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। बेलगावी जिले में राजमार्ग पर चक्का जाम करने के बाद किसानों ने अपने आंदोलन का रुख केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास की ओर मार्च करने में बदल दिया है। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि सड़क जाम हटाने का मतलब विरोध प्रदर्शन वापस लेना नहीं है।

किसान गन्ने के लिए 5,500 रुपये प्रति टन और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 60 रुपये प्रति किलोग्राम तय करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने उचित और लाभकारी मूल्य में संशोधन करने, किसानों के बकाये का समय पर भुगतान करने और चीनी मिलों की कड़ी निगरानी की मांग की है। किसानों का आरोप है कि गन्ने के वजन में गड़बड़ी, कम चीनी रिकवरी दिखाने और मिलों द्वारा अनुचित कटौती करके उनका हक मारा जा रहा है। इसलिए वे पारदर्शी तौल प्रक्रिया और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि मिलों के उप-उत्पादों से होने वाली कमाई में भी किसानों को उनका वाजिब हिस्सा मिलना चाहिए।

किसानों की हत्तरगी टोल प्लाजा से हुबली तक लगभग 125 किलोमीटर की यह पदयात्रा बेलागावी और धारवाड़ जिलों के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजर रही है। इससे पहले पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर हत्तरगी और हिरेबागेवाड़ी में चक्का जाम से यातायात प्रभावित हुआ था, जिसे बाद में आम जनता की असुविधा को देखते हुए पदयात्रा के रूप में बदल दिया गया। राजमार्ग से हटने के फैसले से गतिरोध कम नहीं हुआ है और किसान अपनी मांगों के समयबद्ध समाधान के लिए मार्च जारी रखे हुए हैं।

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