दरभंगा , अगस्त 15 -- िहार के प्रतिष्ठित कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि व्यक्ति जहां है, वहीं अपने कर्तव्यों को समझकर ईमानदारी से उसका निर्वहन करे, यही सच्ची राष्ट्रभक्ति है।कामेश्वर नगर स्थित विश्वविद्यालय मुख्यालय में शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रध्वज फहराने के बाद समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि संस्कृतज्ञों की जिम्मेदारी है कि वे निष्ठा के साथ संस्कृत भाषा को पुष्पित-पल्लवित एवं विकसित करने का प्रयास करते रहें। उन्होंने कहा कि संस्कृत को अक्षुण्ण रखने के लिए आने वाली चुनौतियों को समझने और परखने के साथ इसकी मजबूती एवं सार्थकता के लिए निरंतर प्रचार-प्रसार करना आवश्यक है। यही राष्ट्र सेवा और राष्ट्रभक्ति भी होगी।
उन्होंने वीर शहीदों एवं सैनिकों के साथ ऋषि-मुनियों के बलिदान, त्याग एवं तपस्या को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि बाहरी आक्रमणकारियों और देश विरोधी ताकतों ने संस्कृत को नष्ट करने के अनेक प्रयास किए, लेकिन मनीषियों के अथक प्रयासों के कारण यह भाषा सुरक्षित रह सकी। संस्कृत का विकास विश्व हित में भी आवश्यक है और इसके लिए उपलब्ध विभिन्न साधनों एवं संसाधनों का उपयोग किया जाना चाहिए।
कुलपति डॉ. पांडेय ने कहा कि देश को विकसित बनाने के लिए खून नहीं, बल्कि पसीना बहाने की जरूरत है। देश की करीब 65 प्रतिशत युवा आबादी से उन्होंने विकास यात्रा में बड़ी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने, कौशल विकास को प्रोत्साहित करने तथा पारंपरिक शैक्षणिक दर्शन को मजबूत करने की अपील की।उन्होंने कहा कि करीब नौ दशक की लंबी लड़ाई के बाद देश को आजादी मिली है, लेकिन आज भी कई गंभीर चुनौतियां सामने हैं, जिनका मिलकर मुकाबला करना होगा। देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर वीर जवान डटे हुए हैं। सैनिकों के परिजनों को भी उचित सम्मान और सहयोग देना आवश्यक है, ताकि जवान पूरी निष्ठा से देश की सेवा कर सकें। ऐसा वातावरण बनाए रखना भी राष्ट्रभक्ति है।
कुलसचिव डॉ. दिनेश झा ने अमर शहीद सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस देश सेवा और समाज सेवा का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि संस्कृत की रक्षा एवं विकास से भारतीय संस्कृति मजबूत होगी तथा समाज में एकता और सहयोग की भावना कायम रहेगी।
इसके पूर्व कुलपति प्रो. पांडेय एवं कुलसचिव डॉ. झा ने विश्वविद्यालय मुख्यालय परिसर स्थित संस्थापक महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह एवं लक्ष्मीश्वर सिंह की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की।
हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में आयोजित ध्वजारोहण समारोह में विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, शिक्षक एवं कर्मी उपस्थित थे। एनएसएस के स्वयंसेवकों ने भी पूरे कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई।
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