चंडीगढ़ , अक्टूबर 9 -- पंजाब के पूर्व वित्त आयुक्त (राजस्व) केबीएस सिद्धू ने कृषि ऋण और सरकारी बकाया की वसूली के लिए किसानों को गिरफ्तार करने तथा हिरासत में रखने की व्यवस्था समाप्त करने की मांग करते हुए संसद से देशभर में लागू होने वाला कानून बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब आयकर बकाया की वसूली के लिए गिरफ्तारी का प्रावधान हटाया जा चुका है और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून में भी ऐसा प्रावधान समाप्त करने की सिफारिश की गई है, तो किसानों को इस संरक्षण से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
श्री सिद्धू ने शुक्रवार को जारी एक बयान में आयकर और जीएसटी से जुड़े हालिया सुधारों का स्वागत करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि कर्ज या बकाया राशि का भुगतान नहीं कर पाने वाले किसानों की गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से राजस्व वसूली अधिनियम, 1890 में संक्षिप्त संशोधन करने का आग्रह किया, ताकि केंद्र और राज्य सरकारों के किसी भी कानून के तहत बकाया वसूली के लिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया जा सके। उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 17 सितंबर 2026 को आयकर बकाया वसूली के नियमों से गिरफ्तारी और हिरासत संबंधी प्रावधान हटा दिए थे। संसद पहले ही आयकर अधिनियम से इस शक्ति को समाप्त कर चुकी थी। इसी तरह, आठ अक्टूबर को हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में जीएसटी कानून के तहत गिरफ्तारी का प्रावधान हटाने और अभियोजन शुरू करने के लिए कर बकाया की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की सिफारिश की गई।
श्री सिद्धू ने कहा कि करदाताओं और व्यापारियों से बकाया वसूलने के लिए उन्हें जेल में डालने की व्यवस्था समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, इसलिए यही सिद्धांत किसानों पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा, ''राज्य ने सही फैसला लिया है कि वह करदाता या व्यापारी को जेल में डालकर अपना बकाया नहीं वसूलेगा। यही फैसला अब तहसील स्तर तक पहुंचना चाहिए।''श्री सिद्धू के अनुसार, पंजाब भू-राजस्व अधिनियम, 1887 और देश के कई अन्य राज्यों में लागू समान कानूनों के तहत सहकारी ऋण या सरकारी अग्रिम का भुगतान नहीं करने वाले किसान से बकाया राशि की वसूली भू-राजस्व के बकाये के रूप में की जा सकती है। इसके तहत राजस्व अधिकारी के आदेश पर किसान को तहसील की हवालात में दस दिन तक और जिलाधीश के आदेश पर दीवानी जेल में एक महीने तक रखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसान की फसल, पशु, ट्रैक्टर और जमीन की कुर्की तथा नीलामी भी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में किसी दीवानी अदालत का आदेश आवश्यक नहीं होता। उनके मुताबिक, गिरफ्तारी और हिरासत की यह शक्ति केवल कानून की किताबों तक सीमित नहीं है। अप्रैल 2022 में पंजाब में सहकारी समितियों और भूमि विकास बैंकों के कर्जदार किसानों के खिलाफ 2,000 से अधिक गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि व्यापक विरोध के बाद इन वारंटों को वापस लेना पड़ा था।
श्री सिद्धू ने कहा कि कर्ज की वसूली के लिए किसानों को गिरफ्तार करना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि इससे उन्हें सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि किसान की जमीन का रिकॉर्ड सरकार के पास जमाबंदी में दर्ज होता है और उसकी संपत्ति को कानून के अनुसार कुर्क करके बेचा जा सकता है। इसलिए बकाया वसूली के लिए गिरफ्तारी को आवश्यक नहीं माना जाना चाहिए।उन्होंने उच्चतम न्यायालय के 1980 के जॉली जॉर्ज वर्गीज बनाम बैंक ऑफ कोचीन मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल भुगतान करने में असमर्थता के आधार पर किसी व्यक्ति को जेल में नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत गरिमा के आश्वासन का हवाला देते हुए कहा कि किसानों को भी समान सम्मान और कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
श्री सिद्धू ने इस मुद्दे पर केंद्र और पंजाब सरकार के लिए अलग-अलग कदम सुझाए हैं। उन्होंने संसद से राजस्व वसूली अधिनियम, 1890 में संशोधन कर ऐसा स्पष्ट प्रावधान जोड़ने की मांग की, जिसके तहत किसी भी केंद्रीय या राज्य कानून के अंतर्गत बकाया, सार्वजनिक मांग अथवा ऋण की वसूली के लिए गिरफ्तारी और हिरासत नहीं हो सके। उनके प्रस्ताव के अनुसार, वसूली संपत्ति के माध्यम से की जानी चाहिए, जबकि संपत्ति को धोखाधड़ी से छिपाने वालों के खिलाफ आपराधिक अदालत में कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने पंजाब विधानसभा से पंजाब भू-राजस्व अधिनियम, 1887 से गिरफ्तारी और हिरासत संबंधी प्रावधान हटाने की भी अपील की। उनका सुझाव है कि राज्य जीएसटी अधिनियम में जीएसटी परिषद की सिफारिशों को लागू करने के लिए संशोधन करते समय ही यह बदलाव किया जाए। उन्होंने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर वित्त आयुक्त (राजस्व) से सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश जारी करने की मांग की कि किसी किसान के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया जाए।
श्री सिद्धू ने कहा कि वह वित्त आयुक्त (राजस्व) के रूप में अपने दो कार्यकालों के दौरान किसानों को कर्ज चुकाने में विफल रहने के कारण जेल नहीं भेजे जाने देने के पक्ष में रहे। उन्होंने बताया कि उस दौरान राजस्व और सहकारिता विभागों ने कर्ज राहत योजनाओं के माध्यम से किसानों की सहायता करने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों का संयम किसानों को राहत दे सकता है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए कानूनी संरक्षण जरूरी है। सिद्धू ने पंजाब के सभी राजनीतिक दलों से 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस दिशा में कानून बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों को गिरफ्तारी, कुर्की और नीलामी से राहत देने का वादा केवल चुनावी घोषणापत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे कानून का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
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