भरतपुर , अगस्त 28 -- राजस्थान में करौली जिले में रक्षाबंधन पर्व पर रियासतकाल से चली आ रही पतंगबाजी का उत्साह शुक्रवार को चरम पर नजर आया।
दिन निकलते ही छतों पर पतंग उड़ाते हुए बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्गों में आसमान में उड़तीरंग-बिरंगी पतंगों के बीच दूसरों की पतंग काटने की होड़ लगी रही और जगह-जगह से 'वो काटा' 'वो मारा' की आवाजें सुनाई देती रही। पतंगबाजी को लेकर बाजारों में भी पतंग, मांझे और चरखियों की बिक्री तेज रही। इस बार बाजार में 10 से लेकर करीब 200 रुपए तक की पारंपरिक पतंगों के साथ मोटू-पतलू, स्पाइडरमैन और अन्य कार्टून किरदारों वाली पतंगों के प्रति ग्राहकों का विशेष आकषण रहा। मांझे की रीलें भी गुणवत्ता के अनुसार 150 से 500 रुपए तक में उपलब्ध रही।
करौली में पतंगबाजी की परंपरा के साथ पतंग बनाने का काम भी लंबे समय से चला आ रहा है। और कई परिवार पीढ़ियों से पतंग बनाने के कार्य से जुड़े हुए हैं। पतंगबाजी के इस उत्साह के बीच प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश जारी करते चीनी मांझे के साथ धातु, नायलॉन और प्लास्टिक से बने मांझे की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। पक्षियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुबह छह से आठ बजे और शाम पांच से सात बजे तक पतंग उड़ाने पर भी रोक लगायी गयी है।
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