चेन्नई , अक्टूबर 29 -- तमिलनाडु में चेन्नई की एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करते हुए गुरुवार को करोड़ों रुपये के निजी विद्यालय धोखाधड़ी मामले में द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी की जमानत याचिका पर सुनवाई दो नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी।

जमानत याचिका के साथ पुलिस की उस अर्जी पर भी सुनवाई होनी थी, जिसमें पूछताछ के लिए उन्हें हिरासत में देने की मांग की गयी है।

विशेष अदालत के न्यायाधीश एल.एस. सत्यामूर्ति के समक्ष जमानत याचिका सुनवाई के लिए आयी। इसमें अनबिल महेश ने अपनी गिरफ्तारी को भी चुनौती दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 36 के तहत गिरफ्तारी की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। साथ ही, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए के तहत आवश्यक मंजूरी के बिना ही प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी थी।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि अनबिल महेश से पूछताछ के लिए उन्हें पुलिस हिरासत में देने की अनुमति मांगते हुए याचिका दायर की गयी है। पूर्व मंत्री के वकील ने कहा कि उनके आवास पर तलाशी के दौरान जब्त किये गये इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लौटाने के लिए भी अलग याचिका दायर की गयी है। उन्होंने इस याचिका पर भी सुनवाई करने का अनुरोध किया। न्यायाधीश ने पुलिस को जमानत याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए तीनों याचिकाओं पर सुनवाई दो नवंबर तक स्थगित कर दी।

एक निजी स्कूल को मान्यता देने के मामले में 100 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में गिरफ्तारी के दो दिन बाद अनबिल महेश ने कल जमानत याचिका दायर की थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस घोटाले की रकम 400 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।

जमानत याचिका में अनबिल महेश ने दलील दी कि स्कूलों को मान्यता देते समय सभी नियमों का पालन किया गया था और उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया है, तो इसके लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

श्री महेश ने कहा कि मान्यता देते समय निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का विधिवत पालन किया गया था तथा इस मामले में उन्होंने कोई अनियमितता नहीं की। उन्होंने दलील दी कि उनकी हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत को साबित करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और उनके बिना हिरासत में भी जांच आगे बढ़ायी जा सकती है। उन्होंने जांच एजेंसी को सहयोग करने और अदालत की ओर से लगाई जाने वाली किसी भी शर्त का पालन करने की इच्छा भी जतायी।

उन्होंने खुद के खिलाफ लगाये गये आरोपों को खारिज करते हुए जमानत की मांग की। उन्होंने कहा कि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह अग्न्याशयशोथ (पैंक्रियाटाइटिस) से पीड़ित हैं।

इसी दौरान, केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) की पुलिस ने इस करोड़ों रुपये के घोटाले के सिलसिले में प्रमुख महिला उद्यमी शनमुगप्रिया के आवासों पर भी छापेमारी की। खबरों के अनुसार, पूर्व मंत्री को 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में शामिल बताया गया है।

धनशोधन से जुड़े मामले की जांच के तहत केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) पुलिस की 10 सदस्यीय टीम ने पेरुंगुडी स्थित उनके राम्स रागश्री विला पर छापेमारी की और तलाशी ली। इस दौरान कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किये गये। अनबिल महेश को 26 अक्टूबर को मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के कुछ घंटे बाद सीसीबी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें छह नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल वह पुजल केंद्रीय जेल में बंद हैं।

मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के मई में सत्ता संभालने और पिछली द्रमुक सरकार के कार्यकाल में पूर्व मंत्रियों से जुड़ी विभिन्न कथित भ्रष्ट गतिविधियों की जांच शुरू करने के बाद भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार होने वाले अनबिल महेश द्रमुक के पहले पूर्व मंत्री हैं।

पुलिस ने कहा कि अनबिल महेश और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इस मामले में एक प्रमुख पहलू यह भी है कि दूसरे आरोपी के रूप में नामजद मुथुकुमार अब भी फरार है। हालांकि, अपुष्ट खबरों में कहा गया है कि पूर्व मंत्री को उसके ठिकाने की जानकारी थी।

अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने कहा था कि पूर्व मंत्री कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि पार्टी फंड के नाम पर धन के बड़े लेन-देन की जांच के मद्देनजर पूर्व मंत्री से पूछताछ के बाद ही लाभार्थियों की पहचान की जा सकती है। वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के लिए 'पार्टी फंड' शब्द को एक तरह से परोक्ष नाम के रूप में इस्तेमाल किया है। पुलिस ने इस कथित गतिविधि को 'वित्तीय आतंकवाद' बताया है।

पुलिस की दलीलों को स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है। इसके बाद उन्होंने अनबिल महेश की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीसीबी) ने उन्हें गिरफ्तार किया, जिसके बाद उन्होंने नियमित जमानत के लिए याचिका दायर की। इस याचिका पर सुनवाई दो नवंबर तक स्थगित कर दी गयी है।

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