मऊ , मई 30 -- भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के राष्ट्रीय नेता एवं पश्चिम बंगाल प्रभारी शक्ति सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल कभी देश की प्रमुख औद्योगिक नगरी और रोजगार का बड़ा केंद्र हुआ करता था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों के कारण राज्य की औद्योगिक पहचान को गंभीर क्षति पहुंची। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान राजनीतिक बदलाव जनता के आक्रोश का परिणाम है।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजयुमो के राष्ट्रीय नेता शक्ति सिंह ने यूनीवार्ता से विशेष बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल में जूट, कपड़ा और अन्य उद्योगों के साथ-साथ खनिज संसाधनों पर आधारित औद्योगिक ढांचा न केवल राज्य बल्कि बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता था। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि राज्य के अनेक युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों की ओर पलायन करने को विवश हैं।

उन्होंने कहा कि लगभग पांच वर्ष पूर्व पार्टी नेतृत्व ने उन्हें पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस दौरान व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया गया और घर-घर पहुंचकर लोगों से संवाद स्थापित किया गया। उनके अनुसार बातचीत के दौरान यह महसूस हुआ कि राज्य में लोग सुरक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों को लेकर चिंतित हैं।

शक्ति सिंह ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने तुष्टिकरण की राजनीति, औद्योगिक निवेश के प्रति उदासीनता और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों पर प्रभावी कदम नहीं उठाए, जिससे राज्य के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक हिंसा और भय के वातावरण के कारण लोग खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते थे।

उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर लोगों के बीच विश्वास पैदा करने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप मतदाताओं ने चुनाव में खुलकर अपनी राय व्यक्त की। उनके अनुसार हालिया चुनाव परिणाम जनता की नाराजगी का प्रतिबिंब हैं।

अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर शक्ति सिंह ने कहा कि राज्य में इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटना आवश्यक है। उनका मानना है कि कानून व्यवस्था को मजबूत करने और निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करने से पश्चिम बंगाल को फिर से औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ने आसपास के राज्यों के आर्थिक विकास को गति दी है, उसी प्रकार कोलकाता और पश्चिम बंगाल का औद्योगिक विकास पूर्वी भारत के व्यापक क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विकासोन्मुख नीतियों और निवेश को बढ़ावा देकर पश्चिम बंगाल को पुनः औद्योगिक प्रगति के मार्ग पर अग्रसर किया जा सकता है।

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