जालंधर , मई 29 -- केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र (सीआइपीएमसी), जालंधर द्वारा 26से 29 मई तक कपास उत्पादक क्षेत्रों में सर्वेक्षण एवं किसान जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य किसानों को कपास की फसल में शुरुआती अवस्था में होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाव के लिए बीज उपचार (सीड ट्रीटमेंट) के महत्व के प्रति जागरूक करना था।

अभियान के दौरान किसानों को बताया गया कि बुवाई से पहले उचित बीज उपचार करने से फसल को फफूंद जनित रोगों और शुरुआती कीटों के प्रकोपसे सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है, उत्पादन बढ़ता है और खेती की लागत में कमी आती है। टीम ने किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) और जैविक उपाय अपनाने पर विशेष जोर दिया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, जालंधर के हर्ष पुनिया और तकनीकी सहायक दीपक शामिल रहे।

अभियान के तहत मानसा जिले के गांव काहनवाला, खियाली चियानवाली, मूसा तथा बठिंडा जिले के कोट गुरु, संगत कलां और ज्वाला सिंह वाला समेत कई गांवों में किसानों के खेतों का दौरा कर फसल की स्थिति का निरीक्षण किया गया। इस दौरान किसानों के बीच फेरोमोन ट्रैप्स वितरित किये गये और खेतों में उनकी स्थापना भी करवाई गई। साथ ही प्रयोगशाला में तैयार ट्राइकोडर्मा का वितरण किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि इन जैविक उपायों से कीट और रोग प्रबंधन प्रभावी तरीके से किया जा सकता है तथा रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होती है।

किसानों को रस चूसक कीटों की रोकथाम, फेरोमोन ट्रैप्स की नियमित निगरानी, रोग नियंत्रण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग संबंधी जानकारी भी दी गई। इसके अलावा उन्हें मोबाइल ऐप के माध्यम से फसल में लगने वाले कीटों और बीमारियों की तस्वीरें अपलोड कर समय पर समाधान प्राप्त करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

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