बैतूल , जुलाई 29 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के शासकीय कन्या आश्रम शाला पाढर की अधीक्षिका भावना मसराम को मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की अनुशंसा पर निलंबित कर दिया गया है। आयोग के औचक निरीक्षण में आश्रम संचालन में अनियमितताएं मिलने तथा निरीक्षण के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई रील को भी विभागीय कार्रवाई का आधार बनाया गया है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य मंगल सिंह धुर्वे ने 13 जुलाई को आश्रम का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान अधीक्षिका बिना पूर्व सूचना अथवा स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित मिलीं। आयोग ने पाया कि आश्रम का संचालन एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे किया जा रहा था।

निरीक्षण के दौरान छात्राओं ने भोजन की गुणवत्ता और दैनिक व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें भी कीं। उनका कहना था कि निर्धारित मेन्यू के अनुरूप भोजन और नाश्ता उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था तथा दोनों समय रोटी भी नहीं दी जाती थी। आश्रम परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

आयोग की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि स्थानीय लोगों और छात्राओं के अनुसार अधीक्षिका नियमित रूप से आश्रम में रात्रि निवास नहीं करती थीं और सप्ताह में केवल दो-तीन दिन ही आश्रम आती थीं। आयोग ने इसे छात्राओं की सुरक्षा और सेवा नियमों की दृष्टि से गंभीर माना।

सूत्रों के अनुसार निरीक्षण के बाद अधीक्षिका ने फेसबुक पर एक वीडियो (रील) पोस्ट कर अपनी अनुपस्थिति का कारण बेटे को चिकित्सक के पास ले जाना बताया। आयोग का आरोप है कि वीडियो में आयोग सदस्य के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी भी की गई।

आयोग सदस्य ने 21 जुलाई को जनजातीय कार्य आयुक्त को पत्र लिखकर निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इसके बाद जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त ने अधीक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय घोड़ाडोंगरी निर्धारित किया है।

सूत्रों ने बताया कि विभागीय जांच में छात्राओं से गृहकार्य कराने और शौचालयों की सफाई करवाने संबंधी शिकायतें भी सामने आई हैं। विभाग का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच प्रतिवेदन के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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