पटना , मार्च 04 -- बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान ने बुधवार को कहा कि कानून चाहे कितनी भी कड़ी सजा का प्रावधान करे शराबबंदी से जुड़े अपराधों को शून्य तक नहीं लाया जा सकता है। मंत्री श्री खान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राज्य में शराबबंदी लोगों को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने की अच्छी मंशा से लागू की गई थी और इसके फायदे भी हुए हैं। उन्होंने बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा की उठ रही मांगों के संदर्भ में कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि शराबबंदी विफल हो गई है।
मंत्री ने कहा कि प्रशासन इस बात को सुनिश्चित कर रहा है कि सड़क या कहीं भी नशे की हालत में पाए जाने वाले व्यक्ति पर कानून के हिसाब से कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों को सजा दी जा रही है और यदि कार्रवाई नहीं हो रही होती तो बड़ी संख्या में उल्लंघनकर्ता जेल में नही होते। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून काउल्लंघन करने वालों के खिलाफ उच्च न्यायालय सहित राज्य की विभिन्न अदालतों में बड़ी संख्या में चल रहे मामले बता रहे हैं कि सरकार इसके लिए गम्भीर है।
श्री खान ने कहा कि यह सही है कि शराबबंदी कानून के उल्लंघन के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन यह भी सच है कि कड़ी से कड़ी सजा भी अपराध को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई देशों में अपराध के लिए हाथ-पैर काटने जैसे कठोर दंड का प्रावधान है, फिर भी अपराध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
मंत्री ने कहा कि बिहार में शराबबंदी को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों को सरकार और प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वार्थी तत्व हर जगह होते हैं, जो अपने निजी लाभ के लिए कानून तोड़ने की कोशिश करते हैं। कानून का पालन करने वाले नागरिकों को चाहिए कि वे किसी भी उल्लंघन की जानकारी पुलिस या अधिकृत अधिकारियों को दें।
मंत्री ने कहा कि समाज के निचले तबके में घरेलू हिंसा की बड़ी संख्या में घटनाएं सामने आती थीं और गरीबों को अपनी मेहनत की कमाई शराब पर खर्च करने से रोकने के लिए ही शराबबंदी लागू की गई।
श्री खान ने कहा कि शराब सेवन कई तरह की बीमारियों का कारण भी बनता है, जिससे प्रभावित परिवारों पर इलाज का भारी खर्च पड़ता है और नागरिकों की जिंदगी बेहतर बनाना सरकार की जिम्मेदारियों में शामिल है।
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