भुज , जनवरी 31 -- गुजरात में कच्छ के बन्नी के रतन 'छारी-ढंढ' पक्षी अभयारण्य को आधिकारिक रूप से 'रामसर साइट' घोषित किया गया है।

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया ने शनिवार को इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए कहा कि छारी-ढंढ पक्षी अभयारण्य को रामसर साइट का दर्जा मिलने से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, स्थानीय विकास और वैश्विक पहचान जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आयेगा। छारी-ढंढ गुजरात का पांचवां और कच्छ का पहला अंतरराष्ट्रीय महत्व वाला वेटलैंड (आर्द्रभूमि) बन गया है।

गुजरात के लिए गर्व की बात है कि कच्छ जिले में स्थित छारी ढंढ पक्षी अभयारण्य को अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है। इसके साथ ही गुजरात में रामसर स्थलों की संख्या अब बढ़कर पांच हो गयी है।

श्री मोढवाडिया ने कहा कि गुजरात वेटलैंड के संरक्षण और संवर्धन में सदैव अग्रसर रहा है। देश के कुल वेटलैंड क्षेत्रफल में गुजरात का हिस्सा 21 फीसदी है, जो अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। गुजरात के वेटलैंड लगभग तीन करोड 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हैं, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 17.8 फीसदी है।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वेटलैंड संवर्धन के लिए लगातार प्रयासरत है। राज्य में मरीन नेशनल पार्क (समुद्री राष्ट्रीय उद्यान) और अभयारण्य, खिजड़िया अभयारण्य, नल सरोवर अभयारण्य, छारी ढंढ, कच्छ का छोटा रण-घुड़खर अभयारण्य और पोरबंदर पक्षी अभयारण्य जैसे अनेक वेटलैंड आधारित संरक्षित क्षेत्र हैं।

गांधीनगर स्थित गिर फाउंडेशन गुजरात में वेटलैंड इकोसिस्टम की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए वैज्ञानिक शोध, निगरानी कार्यक्रम और वेटलैंड शोध एवं दस्तावेजीकरण में सक्रिय रूप से शामिल है। उन्होंने कहा कि कच्छ के इको-टूरिज्म और पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। एशिया का सबसे बड़ा घास का मैदान माने जाने वाले बन्नी क्षेत्र के छोर पर स्थित 'छारी-ढंढ' कंजर्वेशन रिजर्व को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वेटलैंड साइट यानी 'रामसर साइट' घोषित किया गया है। नल सरोवर, थोल, खिजड़िया और वढवाणा के बाद अब 'छारी-ढंढ' गुजरात का पांचवां और कच्छ का पहला रामसर स्थल बन गया है।

श्री अर्जुनभाई मोढवाडिया ने कहा कि छारी-ढंढ पक्षी अभयारण्य को रामसर साइट के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलना गुजरात के लिए गर्व की बात है। इससे राज्य के पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। इस मान्यता से छारी-ढंढ वेटलैंड का दीर्घकालिन संरक्षण सुनिश्चित होगा, प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल मजबूत बनेगा और दुर्लभ एवं लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे।

इसके अलावा, रामसर साइट का दर्जा मिलने से क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार और आय के नये अवसर खुलेंगे। पर्यावरण जागरूकता, शैक्षणिक गतिविधियों और समुदाय की सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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