पटना , अक्टूबर 06 -- शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मंगलवार को कहा कि बिहार के सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही और अंगिका में से एक अतिरिक्त क्षेत्रीय भाषा पढ़ाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के साथ बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, कौशलयुक्त और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
श्री तिवारी ने कहा कि क्षेत्रीय भाषा के चयन में विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए पाठ्यक्रम, शिक्षण सामग्री और प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा मिलने से बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता बेहतर होगी।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य के जर्जर स्कूल भवनों की तकनीकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद भवनों की मरम्मत, पुनर्निर्माण या उन्हें सुरक्षित घोषित करने के संबंध में आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।
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