मुरादाबाद , जुलाई 29 -- अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बनी रहने के बावजूद कंटेनरों की भारी कमी और समुद्री भाड़े में लगातार हो रही वृद्धि से देश के हैंडीक्राफ्ट एवं होम डेकोर निर्यात उद्योग के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एमएचईए) ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एमएचईए के अध्यक्ष नावेद उर रहमान ने बुधवार को बताया कि जुलाई का अंतिम सप्ताह निर्यात उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी अवधि में विश्वभर के प्रमुख खरीदार क्रिसमस और अन्य त्योहारी सीजन की बिक्री के लिए बड़े पैमाने पर माल मंगाते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर कंटेनर उपलब्ध न होने के कारण तैयार माल फैक्ट्रियों और गोदामों में रुका हुआ है, जबकि समुद्री भाड़े में हुई भारी बढ़ोतरी ने निर्यातकों की लागत और बढ़ा दी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि शिपमेंट में देरी होती है तो विदेशी खरीदारों तक माल समय से नहीं पहुंच पाएगा, जिससे उनके पास पुराना स्टॉक जमा हो जाएगा। इसका प्रतिकूल प्रभाव अगले वर्ष मिलने वाले निर्यात ऑर्डरों पर भी पड़ सकता है और खरीदार सीमित मात्रा में ही खरीदारी करेंगे।
एसोसिएशन के अनुसार हाल के सप्ताहों में एशिया से यूरोप मार्ग पर समुद्री भाड़ा 35 से 45 प्रतिशत तथा अमेरिका के पूर्वी तट के लिए 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गया है। वहीं कंटेनरों की उपलब्धता घटने से बुकिंग स्लॉट मिलना भी कठिन हो गया है।
नावेद उर रहमान ने कहा कि एफओबी (फ्री ऑन बोर्ड) आधार पर होने वाले निर्यात में सामान्यतः भाड़े का भुगतान खरीदार करता है, लेकिन बढ़ी हुई लागत के कारण कई विदेशी खरीदार अब निर्यातकों से भी भाड़े का कुछ हिस्सा वहन करने का आग्रह कर रहे हैं। ऑर्डर रद्द होने और गोदामों में माल फंसने की आशंका के चलते कई निर्यातक विवश होकर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में यह खरीदारों की स्थायी शर्त बन सकती है, जिससे पहले से कम लाभांश पर काम कर रहे निर्यात उद्योग पर और अधिक दबाव पड़ेगा।
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