मुरादाबाद , जुलाई 27 -- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के पूर्व सांसद एवं समाजवादी पार्टी (सपा) नेता डॉ. एस.टी. हसन ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय प्रकरण में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का बचाव करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के निर्माण के समय आजम खान स्वयं प्रदेश सरकार में बेहद प्रभावशाली मंत्री थे और निर्माण संबंधी वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा कराना उनकी जिम्मेदारी थी। डॉ. हसन ने सोमवार को कहा कि एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी द्वारा जौहर विश्वविद्यालय मामले में अखिलेश यादव पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान या भवन के निर्माण के दौरान यदि कोई वैधानिक या प्रशासनिक प्रक्रिया शेष रह जाती है, तो उसे पूरा कराने की जिम्मेदारी निर्माण कराने वाले व्यक्ति की होती है।

उन्होंने कहा कि जब जौहर विश्वविद्यालय का निर्माण कराया गया था, उस समय आजम खान उत्तर प्रदेश सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में शामिल थे। उनके पास पर्याप्त प्रशासनिक अधिकार और संसाधन उपलब्ध थे। यदि भवनों के नक्शों के अनुमोदन अथवा अन्य वैधानिक औपचारिकताओं में कोई कमी रह गई, तो उसे उसी समय पूरा कराया जा सकता था।

पूर्व सांसद ने कहा कि विश्वविद्यालय के भवनों के नक्शे स्वीकृत हैं या नहीं, इसकी जानकारी अखिलेश यादव को होना आवश्यक नहीं था। यह पूरी तरह निर्माणकर्ता की जिम्मेदारी थी कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं समय पर पूरी कराई जाएं और संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की जाएं।

डॉ. हसन ने कहा कि संभवतः आजम खान को यह अनुमान नहीं था कि उस समय की एक प्रशासनिक चूक आगे चलकर इतना बड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद बन जाएगी। उन्होंने इसे एक प्रशासनिक भूल बताया। उन्होंने एआईएमआईएम प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव बिना प्रचार किए अपने वरिष्ठ नेता आजम खान के साथ खड़े हैं और आवश्यक सहयोग कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जौहर विश्वविद्यालय के भवनों से संबंधित कार्रवाई के विरुद्ध दायर अपील पर मामला वर्तमान में मंडलायुक्त मुरादाबाद की अदालत में विचाराधीन है।

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