बेंगलुरु , अक्टूबर 20 -- ओला इलेक्ट्रिक ने अपने कर्मचारी के.अरविंद की मौत से संबंधित प्राथमिकी दर्ज किये जाने को कर्नाटक उच्च न्यायालय में सोमवार को चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने कंपनी और उसके अधिकारियों के पक्ष में सुरक्षात्मक आदेश पारित किया है।
अरविंद के भाई अश्विन कन्नन द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में ओला के संस्थापक भाविश अग्रवाल, वरिष्ठ कार्यकारी सुब्रत कुमार दास और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 के अंतर्गत दर्ज मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने, 17.46 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता एवं कार्यस्थल पर लगातार उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। 38 वर्षीय अरविंद ने कथित रूप से 28 पृष्ठों का एक 'सुसाइड नोट' छोड़ा है, जिसमें काम को लेकर बार-बार दबाव डालने के साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किये गये हैं।
उल्लेखनीय है कि 28 सितंबर को अरविंद ने कथित रूप से अपने घर पर ज़हर खा लिया था। उसे एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गयी, पुलिस ने प्राथमिकी में दर्ज सभी लोगों को नोटिस जारी कर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है और जांच जारी है। अधिकारी उत्पीड़न के दावों और कथित वित्तीय अनियमितता दोनों की समीक्षा कर रहे हैं।
कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, " हम अपने सहयोगी अरविंद के दुर्भाग्यपूर्ण निधन से बहुत दुखी हैं और इस कठिन समय में हमारी संवेदनायें उनके परिवार के साथ हैं। अरविंद साढ़े तीन साल से ओला इलेक्ट्रिक से जुड़े थे और हमारे बेंगलुरु मुख्यालय में कार्यरत थे। "उन्होंने कहा, " अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपनी नौकरी या उत्पीड़न के बारे में कभी कोई शिकायत नहीं की। उनकी भूमिका में प्रमोटर सहित कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के साथ कोई सीधा संपर्क भी शामिल नहीं था।"प्रवक्ता ने कहा कि ओला इलेक्ट्रिक ने अरविंद के बैंक खाते में तुरंत पूर्ण एवं अंतिम भुगतान कर दिया है और जांच में अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। प्रवक्ता ने कहा, "ओला इलेक्ट्रिक सभी कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और सहायक कार्यस्थल बनाये रखने के लिए प्रतिबद्ध है।"इस घटना ने भारत के तकनीकी और स्टार्टअप क्षेत्र में कार्यस्थल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं और शिकायत निवारण, कर्मचारी सुरक्षा और कॉर्पोरेट जवाबदेही में कमियों को उजागर किया है। वरिष्ठ अधिकारियों की जांच के घेरे में आने के बाद इस मामले ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है।
अधिकारियों ने पूरी जांच का वादा किया हैं, जिसमें मृत्यु नोट में दर्ज हर दावे, कथित वित्तीय अनियमितताओं और मानव संसाधन प्रथाओं की जांच की जायेगी।
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