भुवनेश्वर , नवंबर 07 -- ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) आर. एस. गोपालन ने 11 नवंबर को होने वाले नुआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव से पहले नागरिकों, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से डिजिटल प्लेटफार्मों पर संयम बरतने और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के प्रावधानों का पालन करने का आग्रह किया है।

सीईओ ने शुक्रवार को मतदान समाप्ति से पूर्व 48 घंटे की अवधि के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया जिसका उद्देश्य पारदर्शिता तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है।

श्री गोपालन ने बल देकर कहा कि मौन अवधि मतदाताओं को राजनीतिक प्रचार या प्रलोभनों के प्रभाव में आए बिना स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्णय लेने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने दोहराया कि इस अवधि के शुरू होने के बाद सभी प्रकार के प्रचार बंद कर देने चाहिए।

सीईओ ने निर्देश दिया कि निर्वाचन क्षेत्र में बाहर से आए सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं एवं पार्टी सदस्यों को चुनाव प्रचार समाप्त होने के तुरंत बाद क्षेत्र खाली कर देना चाहिए।

नुआपाड़ा के जिला निर्वाचन अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को यह सत्यापित करने का निर्देश दिया गया कि क्या कोई बाहरी व्यक्ति सामुदायिक हॉल, लॉज या कल्याण मंडपों में रह रहा है, और अतिथि सूची की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया गया।

सीईओ ने निर्देश के मुताबिक आने-जाने वाले वाहनों पर नज़र रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल स्थानीय मतदाता ही क्षेत्र में रहें, निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं पर जांच चौकियां स्थापित की जाएंगी। अगर कोई राजनीतिक व्यक्ति चिकित्सा कारणों से निर्वाचन क्षेत्र में है तो जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा सीईओ के परामर्श से गठित एक चिकित्सा बोर्ड द्वारा मामले का सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी छूट के लिए चुनाव आयोग की मंजूरी आवश्यक है तथा व्यक्ति वीडियो निगरानी में रहेगा तथा उसे सभी राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहना होगा।

श्री गोपालन ने याद दिलाया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 के अंतर्गत मतदान समाप्ति से पहले 48 घंटे की अवधि के दौरान बैठक, जुलूस निकालना या सिनेमा, टेलीविजन या इसी तरह के मीडिया के माध्यम से चुनाव संबंधी सामग्री प्रदर्शित करना, जिसमें मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित करना शामिल है, सख्त वर्जित है। उन्होंने चेतावनी दी कि उल्लंघन करने पर दो वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकता है।

सीईओ ने स्पष्ट किया कि तटस्थ राजनीतिक समाचार प्रसारित किए जा सकते हैं लेकिन इस दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने वाले किसी भी चुनावी दृश्य या सामग्री का प्रसारण या प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। कानून के अंतर्गत रेडियो को भी एक समान उपकरण माना गया है और उस पर भी समान प्रतिबंध लागू होते हैं।

धारा 127ए का हवाला देते हुए, श्री गोपालन ने याद दिलाया कि हर चुनावी पर्चे या पोस्टर पर मुद्रक एवं प्रकाशक का नाम और पता अंकित होना चाहिए। मुद्रकों को मुद्रित सामग्री और प्रकाशक की घोषणा की प्रतियां सीईओ या ज़िला मजिस्ट्रेट को भी भेजनी होंगी।

इसके अलावा, मतदान के दिन या उससे पहले वाले दिन समाचार पत्रों में कोई भी राजनीतिक विज्ञापन प्रकाशित नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसे जिला या राज्य स्तर पर मीडिया प्रमाणन एवं निगरानी समिति (एमसीएमसी) द्वारा पूर्व-प्रमाणित न किया गया हो। यह उपाय इस संवेदनशील अवधि के दौरान भ्रामक या संवेदनशील सामग्री के प्रकाशन को रोकने के लिए किया गया है।

श्री गोपालन ने उम्मीदवारों, समर्थकों और नागरिकों सहित सभी व्यक्तियों से आग्रह किया कि वे मौन अवधि के दौरान फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर राजनीतिक सामग्री साझा करने से बचें।

उन्होंने चेतावनी दी कि वोट मांगने, प्रचार सामग्री प्रसारित करने या मतदाताओं को डिजिटल रूप से प्रभावित करने के किसी भी प्रयास को धारा 126 का उल्लंघन माना जाएगा।

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