भुवनेश्वर , मई 9 -- ओडिशा सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करने और न्याय वितरण प्रणाली में सुधार के उद्देश्य से प्रदेश भर में सात महिला त्वरित और पांच साइबर अदालतें स्थापित करने पर विचार कर रही है।

कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शनिवार को यह घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि साइबर अपराध के बढ़ते खतरे से निपटने और तकनीक से जुड़े अपराधों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिये पांच समर्पित साइबर अदालतों की योजना बनाई जा रही है।

राज्य के कानून विभाग और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यू.एन.एफ.पी.ए.) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित "जनसांख्यिकीय परिवर्तन और कानूनी प्रणाली: एक उभरते मानव भविष्य के लिये तैयारी" विषय पर एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए, श्री हरिचंदन ने कहा कि सरकार एक व्यापक रूपरेखा तैयार कर रही है जो न केवल आर्थिक प्रगति बल्कि समग्र सामाजिक विकास पर भी केंद्रित है।

उन्होंने उल्लेख किया कि राज्य, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर जनसांख्यिकीय परिवर्तन सामाजिक और आर्थिक प्रणालियों को महत्वपूर्ण रूप से नया आकार दे रहे हैं। वर्तमान में, ओडिशा और देश की आधी से अधिक जनसंख्या युवाओं की है, लेकिन आने वाले दशकों में बुजुर्गों की आबादी में वृद्धि के साथ इस स्वरूप में बदलाव की उम्मीद है। श्री हरिचंदन ने कहा कि 'विकसित ओडिशा 2036' और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता के लिये कानूनी सुधारों को अगले 50 वर्षों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जाना चाहिये।

ओडिशा के विविध सामाजिक ताने-बाने पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने भविष्य की नीतियां बनाते समय ग्रामीण समुदायों, 62 जनजातीय समूहों और 13 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पी.वी.टी.जी.) की वास्तविकताओं पर ध्यान देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सभी जिलों, क्षेत्रों और समुदायों के लिये जनसांख्यिकी-आधारित नीति नियोजन को प्राथमिकता दे रहा है। नागरिकों को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं में कानूनी जागरूकता अभियान शुरू किये जायेंगे, जबकि एक युवा-केंद्रित नीति पर भी विचार किया जा रहा है।

विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ ने बदलती सामाजिक परिस्थितियों के जवाब में कानूनी प्रणाली को अधिक जन-केंद्रित बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जनसंख्या के रुझान, आर्थिक विकास और विवाद समाधान तंत्र पर भी बात की। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने सड़क बुनियादी ढांचे, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में ओडिशा की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन केवल जनसंख्या के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार प्रणालियों, सामाजिक सुरक्षा और न्याय वितरण से गहराई से जुड़ा हुआ है।

महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने कहा कि बदलती पारिवारिक संरचनाएं और सामाजिक जिम्मेदारियां मुकदमों की बढ़ती संख्या में योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि कानून इस तरह से बनाए जाने चाहिये जिन्हें आम नागरिक आसानी से समझ सकें। यू.एन.एफ.पी.ए. ओडिशा के प्रमुख नदीम नूर ने भी इस पर चर्चा की कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन किस प्रकार सामाजिक प्रणालियों और कानूनी ढांचे को प्रभावित कर रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान, "एक बदलते समाज में कानून: ओडिशा में जनसांख्यिकीय परिवर्तन और कानूनी ढांचा" शीर्षक वाली एक पुस्तिका का विमोचन किया गया। यह प्रकाशन विभिन्न न्यायिक निर्णयों के माध्यम से जनसांख्यिकीय परिवर्तन, शासन और कानूनी प्रणालियों के बीच संबंध की जांच करता है। कानून विभाग के प्रधान सचिव पवित्र मोहन सामल ने स्वागत भाषण दिया, जबकि यू.एन.एफ.पी.ए. के प्रतिनिधि सूर्यप्रकाश ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस कार्यक्रम में तीन तकनीकी सत्र भी शामिल थे जहाँ पूर्व सांसद अमर पटनायक और अन्य विशेषज्ञों ने बुढ़ापे, बदलती पारिवारिक संरचनाओं, किशोरावस्था, सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकियों, देखभाल की जिम्मेदारियों और संस्थागत प्रतिक्रियाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

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