भुवनेश्वर , मई 22 -- वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों ने ओडिशा में हाथियों की घटती आबादी का प्रमुख कारण जानलेवा बीमारियों और बढ़ता मानव-हाथी संघर्ष बताया है और इन्हें बचाने के लिए अच्छी तरह से बीमारी की निगरानी, टीकाकरण, त्वरित निदान और वैज्ञानिक प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है।

एशियाई हाथी को भारत का 'राष्ट्रीय विरासत पशु' माना जाता है और प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) द्वारा 'लुप्तप्राय अनुसूची-I प्रजाति' के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। पिछले तीन दशकों में अपने प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने, जंगल के क्षेत्र, चारे और पानी की कमी, अवैध शिकार और जलवायु-प्रेरित तनाव के कारण हाथियों की आबादी में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।

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