भुवनेश्वर , सितंबर 03 -- ओडिशा में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 18-45 आयु वर्ग के लोगों की संख्या 66 प्रतिशत से अधिक है। इसे देखते हुए राज्य ने एक नई सड़क सुरक्षा योजना को आगे बढ़ाया है, जिसका उद्देश्य भुवनेश्वर और अन्य शहरों को "आदर्श सड़क सुरक्षा शहर" बनाना है।
यह योजना बुधवार को यहां अपराध शाखा के सभा कक्ष में हुई सड़क सुरक्षा बैठक में पेश की गयी। इस बैठक का आयोजन अपराध शाखा, राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए), कॉमन एक्शन फॉर रोड सेफ्टी, ट्रैक्स और होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने मिलकर किया था।
प्रस्तावित मॉडल सड़क सुरक्षा के चार स्तंभों पर (शिक्षा, इंजीनियरिंग, कानून का पालन और आपातकालीन देखभाल) पर आधारित होगा।
शिक्षा के तहत, योजना में स्कूलों और कॉलेजों में सड़क सुरक्षा कार्यक्रम, डिजिटल जागरूकता अभियान और लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों के लिए कंप्यूटर-आधारित ड्राइविंग सिमुलेशन प्रशिक्षण शामिल है।
इंजीनियरिंग वाले हिस्से में दुर्घटना-संभावित जगहों (ब्लैकस्पॉट) की पहचान करने, सड़क के डिजाइन को बेहतर बनाने और स्मार्ट साइनबोर्ड लगाने पर ध्यान दिया जाएगा। कानून के पालन से जुड़े उपायों में हेलमेट और सीट-बेल्ट के नियमों का सख्ती से पालन, स्पीड कैमरों का ज़्यादा इस्तेमाल और ट्रैफिक चौराहों पर सघन जांच शामिल होगी।
आपातकालीन देखभाल वाले हिस्से का मकसद दुर्घटना के शिकार लोगों को 'गोल्डन आवर' (दुर्घटना के बाद का शुरुआती अहम समय) के दौरान तुरंत मेडिकल मदद दिलाना, आपातकालीन स्थिति में मदद के लिए वॉलंटियर्स को ट्रेनिंग देना और दुर्घटना वाली जगहों पर एम्बुलेंस की प्रतिक्रिया को बेहतर बनाना होगा। तेज रफ़्तार और हेलमेट एवं सीट-बेल्ट का इस्तेमाल न करना सड़क हादसों में मौतों की मुख्य वजहें पाई गईं।
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