भुवनेश्वर , अगस्त 23 -- ओडिशा सरकार ने शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और उद्योगों को एक साथ लाने के उद्देश्य से एक एकीकृत 'यूनिवर्सिटी टाउनशिप' (विश्वविद्यालय नगर) स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भुवनेश्वर, संबलपुर और कोरापुट जैसे प्रमुख शहरों के नामों पर विचार किया जा रहा है।

प्रस्तावित यूनिवर्सिटी टाउनशिप को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विकास आयुक्त कार्यालय, आवास एवं शहरी विकास, एमएसएमई, उच्च शिक्षा, उद्योग और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

यह बैठक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत 'चैलेंज रूट' के माध्यम से यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्थापित करने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त-सह-सचिव ने ओडिशा में इस प्रस्ताव और इसके संभावित क्रियान्वयन पर एक प्रस्तुति दी।

योजना के औपचारिक दिशा-निर्देश प्राप्त होना अभी बाकी है, फिर भी प्रस्तावित टाउनशिप को एक एकीकृत शैक्षणिक, अनुसंधान, कौशल और आवासीय पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में परिकल्पित किया गया है। इसे एक विशेष प्रयोजन (एसपीवी) से प्रबंधित किया जाएगा।

बैठक में ओडिशा के समृद्ध खनिज संसाधनों का लाभ उठाते हुए खनन और संबद्ध क्षेत्रों में विशेषज्ञता वाले विश्वविद्यालयों को स्थापित करने की संभावना पर भी चर्चा की गई।

अनुसंधान, नवाचार, इनक्यूबेशन और उत्कृष्टता केंद्र प्रस्तावित टाउनशिप के मुख्य घटक होंगे। इसके तहत शैक्षणिक कार्यक्रम रोजगार पर केंद्रित होंगे और उद्योगों की उभरती जरूरतों के अनुकूल तैयार किए जाएंगे।

प्रस्ताव के अनुसार, टाउनशिप के भीतर 25-25 एकड़ में फैले आठ 'ग्रीनफील्ड' विश्वविद्यालय स्थापित किए जा सकते हैं, जिनमें साझा बुनियादी ढांचा और सुविधाएं मौजूद होंगी।

इस परियोजना को पीपीपी ढांचे के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच संभावित 60:40 के वित्तपोषण पैटर्न के साथ लागू करने का प्रस्ताव है। एसपीवी टाउनशिप के साझा बुनियादी ढांचे और सेवाओं के नियोजन, प्रबंधन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा।

साइट चयन के लिए कई मानदंडों पर चर्चा की गई, जिनमें औद्योगिक और रसद गलियारों से नजदीकी, लगभग 1,000 एकड़ भूमि की उपलब्धता और परियोजना को लागू करने के लिए राज्य की तैयारी शामिल है। शुरुआत में कामाख्यानगर, पुरी-बालूखंड और जटनी-तांगी को संभावित स्थलों के रूप में पहचाना गया था।

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