भुवनेश्वर , अगस्त 07 -- ओडिशा सरकार डॉप्लर मौसम रडार के बड़े नेटवर्क, आधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणाली और बेहतर संचार अवसंरचना के साथ मौसम का पूर्वानुमान लगाने और आपदा प्रबंधन की तैयारी को और बेहतर बना रही है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि संबलपुर में डॉप्लर मौसम रडार पहले से ही काम करना शुरू कर चुका है, जबकि बालासोर और भुवनेश्वर में प्रस्तावित रडार भी जल्द ही चालू हो जाएंगे। गोपालपुर और पारादीप में मौजूद रडार की मरम्मत और उन्नत बनाने का काम भी चल रहा है।
इसके अलावा, पुरी में एक नया डॉप्लर मौसम रडार लगाया जाएगा। उन्होंने गुरुवार को राज्य की आपदा प्रबंधन तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि रडार का यह बड़ा नेटवर्क मौसम का पूर्वानुमान कहीं ज़्यादा सटीक और सही बनाएगा, जिससे राज्य की क्षमता बढ़ेगी कि वह खराब मौसम की घटनाओं का पहले से अंदाज़ा लगा सके और समय पर ज़रूरी कदम उठा सके। सरकार बिजली गिरने से होने वाली मौतों को रोकने के उपाय भी कर रही है।
श्री पुजारी ने बताया कि बिजली गिरने से होने वाली मौतों को कम करने की राज्य की रणनीति के तहत, खेती वाले खेतों में ताड़ के पेड़ लगाने के लिए वन विभाग को 35 करोड़ रुपये मंज़ूर किए गए हैं।
बैठक में भारी बारिश के बाद शहरों में जल-जमाव की समस्या से निपटने के लिए तकनीकी उपायों पर भी चर्चा की गयी। भुवनेश्वर नगर निगम ने इस समस्या का सही समाधान खोजने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। ओडिशा अपने तटीय इलाकों में समय से पहले चेतावनी देने वाले सिस्टम को और बेहतर बना रहा है। अभी राज्य की 573 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर 122 'अर्ली वार्निंग टावर' लगाए गए हैं। रियल-टाइम मॉनिटरिंग और हालात की जानकारी बेहतर करने के लिए इन टावरों को 360-डिग्री सर्विलांस कैमरों से आधुनिक बनाया जाएगा।
राज्य के सभी 314 प्रखंडों को केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से जोड़ने वाले संचार नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। आपदा की चेतावनी को जमीनी स्तर तक तेज़ी और भरोसे के साथ पहुँचाने के लिए मौजूदा नेटवर्क में सैटेलाइट-आधारित टेलीकम्युनिकेशन प्रणाली और आधुनिक हाई-स्पीड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को शामिल किया जाएगा।
राज्य की तैयारी को बेहतर बनाने और सफल तरीकों को अपनाने के लिए, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने गोवा और केरल का दौरा किया है ताकि वहाँ के उन्नत पूर्व चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन के तरीकों का अध्ययन किया जा सके। इन पहलों का मकसद एक मजबूत और टेक्नोलॉजी पर आधारित आपदा प्रबंधन ढांचा तैयार करना है। इसमें चक्रवात, बिजली गिरने, बाढ़ और मौसम की अन्य गंभीर घटनाओं के दौरान सटीक पूर्वानुमान, समय से पहले जानकारी, चेतावनी का तेज़ी से प्रसार और 'लास्ट-माइल कम्युनिकेशन' (अंतिम छोर तक संचार) को बेहतर बनाने पर खास ज़ोर दिया जाएगा।
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