भुवनेश्वर , मई 10 -- ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा (सीबी) ने बालियांटा में एक कांस्टेबल की मॉब लिंचिंग मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए कहा है कि वह इस सनसनीखेज मामले के अन्य पहलुओं के साथ-साथ पुलिस की लापरवाही की भी जांच करेगी।

यह घटना सात मई को उस समय हुई जब कांस्टेबल पर दो युवतियों के साथ बलात्कार का प्रयास करने का आरोप लगा। पीड़ित सौम्य रंजन स्वाइन को पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, जिससे पूरे राज्य में भारी आक्रोश फैल गया।

कटक-भुवनेश्वर आयुक्त कार्यालय पुलिस द्वारा इस मामले को संभालने के तरीके की कड़ी आलोचना हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री मोहन माझी ने जांच अपराध शाखा को सौंप दी। घटना के वीडियो क्लिप में पुलिसकर्मियों को प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करने में विफल होते दिखाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिससे पुलिस की प्रतिक्रिया और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

अपराध शाखा के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) बी. गंगाधर ने कहा कि एजेंसी मामले के सभी आयामों की जांच करेगी। श्री गंगाधर ने मीडिया से कहा, "कांस्टेबल के बलात्कार के प्रयास, उसके बाद भीड़ द्वारा की गई हत्या और घटना के दौरान पुलिस की निष्क्रियता के आरोप-इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।" उन्होंने विस्तृत जांच करने के लिए कई टीमों को गठित किए जाने की बात की।

डीआईजी ने कहा, "मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से पूछताछ की जाएगी। यह पता लगाने के लिए वीडियो फुटेज, तस्वीरें और अन्य सबूत जुटाए जा रहे हैं कि क्या पुलिसकर्मियों की ओर से कोई लापरवाही हुई थी।" उन्होंने कहा कि यदि कोई पुलिसकर्मी कर्तव्य में लापरवाही का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी और विभागीय दोनों तरह की कार्रवाई शुरू की जाएगी।"अपराध शाखा ने बालियांटा पुलिस से जांच अपने हाथ में लेने के बाद दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं- एक बलात्कार के प्रयास से संबंधित और दूसरा भीड़ द्वारा कांस्टेबल की हत्या से संबंधित।

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