भुवनेश्वर , जनवरी 26 -- ओडिशा सरकार ने सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान महात्मा गांधी मार्ग पर "परिवहन क्षेत्र में महिलाएं" विषय पर एक शानदार झांकी का प्रदर्शन किया।

इस प्रदर्शनी में "नारी शक्ति" का उत्सव मनाया गया, जिसमें सुंदरगढ़ की मुन्नी टिग्गा की प्रेरणादायक यात्रा को उजागर किया गया, जिन्होंने सामाजिक मानदंडों एवं व्यक्तिगत कठिनाइयों को चुनौती देते हुए एक अग्रणी लोकोमोटिव पायलट बनने का सफर तय किया। 41 वर्षीय मुन्नी टिग्गा पिछले 14 वर्षों से मालगाड़ी चला रही हैं और उन्होंने पुरुष प्रधान पेशे में कई बाधाओं को तोड़ा है।

सुंदरगढ़ के हातिबारी गांव की निवासी मुन्नी टिग्गा एक किसान परिवार से आती हैं और बचपन से ही आर्थिक कठिनाइयों का सामना करती रही हैं। उन्होंने 2002 में कुमझरिया बालिका उच्च विद्यालय में अपनी कक्षा में टॉप किया था उसके बावजूद, परिवार के सीमित संसाधनों के कारण वह उच्च शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ रहीं।

फिर भी, टिग्गा ने हार नहीं मानी और अपने पिता की खेती में मदद की और बाद में अपने घर से 13-14 किलोमीटर दूर एक निजी कारखाने में मजदूरी की। वह याद करती हैं कि वह प्रतिदिन सुबह दो बजे उठती थीं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में साइकिल से लंबी दूरी तय करती थीं, जो उनकी असाधारण सहनशीलता एवं दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

2004 में उनकी किस्मत बदलने लगी जब राउरकेला में अपनी बड़ी बहन के घर जाने से उनकी शैक्षणिक इच्छा फिर से जागृत हुई। एक स्कूली दोस्त को कॉलेज जाते देख टिग्गा ने एसजी महिला कॉलेज में इंटर में विज्ञान विषय में दाखिला लिया।

हालांकि उन्हें कई नाकामयाबियों का सामना करना पड़ा, जिनमें परीक्षा में असफल होना भी शामिल था लेकिन सहपाठियों के प्रोत्साहन ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सहपाठियों ने उन्हें रेलवे परीक्षा देने का सुझाव दिया।

2006 में, टिग्गा ने बरगढ़ के एक सरकारी आईटीआई कॉलेज में दाखिला लिया, जो उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। कोर्स पूरा करने के बाद उन्होंने रेलवे की परीक्षा पास की और नवंबर 2011 में सहायक लोको-पायलट के रूप में कार्यभार संभाला और अंततः 2016 में लोको-पायलट के पद पर पदोन्नत हुईं। उन्होंने 2013 में शादी की और अब उनका एक बेटा और एक बेटी है।

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