भुवनेश्वर , फरवरी 17 -- ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने राज्य को बायोटेक्नोलॉजी हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना की घोषणा की है।

राज्य विधानसभा में अभिभाषण के दौरान की गई इस घोषणा में पांच वर्षीय रणनीति का खाका पेश किया गया, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक प्रगति को तेज करना और राज्य की बायो-इकोनॉमी को सशक्त बनाना है। राज्य सरकार "जैव प्रौद्योगिकी का विकास" शीर्षक वाली एक समेकित योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 1,113.50 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम 17 उप-योजनाओं से मिलकर बना है और 2025-26 से 2029-30 तक लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य अनुसंधान अवसंरचना को सुदृढ़ करना, उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना और ओडिशा में बायोटेक आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करना है।

समुद्री विज्ञान पर विशेष ध्यान देते हुए सरकार ने अगस्त 2025 में ओडिशा मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर की शुरुआत की थी। इस पहल को मजबूत करने के लिए छह राज्य स्तरीय साझेदार संस्थानों, चेन्नई स्थित राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान को राष्ट्रीय ज्ञान साझेदार के रूप में तथा ऑस्ट्रेलिया की जेम्स कुक विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय ज्ञान साझेदार के रूप में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

राज्य की बायो-इकोनॉमी रूपरेखा को आगे बढ़ाते हुए राज्यपाल ने बताया कि ओडिशा की पहली बायो-इकोनॉमी रिपोर्ट तैयार करने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान, संबलपुर के साथ भी समझौता हुआ है। यह रिपोर्ट बायोटेक आधारित उद्योगों के आर्थिक योगदान का आकलन करेगी और भविष्य की विकास रणनीति तय करेगी। इसके अतिरिक्त, पुरी में एनआईओटी के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। प्रस्तावित केंद्र में एक मरीन कोस्टल ऑब्जर्वेटरी स्थापित की जाएगी, जो उन्नत समुद्र विज्ञान अनुसंधान को समर्थन देने, आपदा लचीलापन बढ़ाने और सतत तटीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन को प्रोत्साहित करने में सहायक होगी।

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