भुवनेश्वर , जून 29 -- ओडिशा सरकार किसानों को समय पर उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए एक नयी योजना लेकर आयी है। इसके तहत राज्यभर में सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरक वितरण को मजबूत करने के लिए 42 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी देने की योजना को मंजूरी दी गयी है।

मौजूदा वित्तीय वर्ष से लागू होने वाले इस पांच वर्षीय कार्यक्रम से प्राथमिक कृषि ऋण समितियों और बड़े क्षेत्र की बहुउद्देशीय सहकारी समितियों सहित लगभग 2,700 जमीनी स्तर की सहकारी समितियों को लाभ होगा। इसके लिए शुरुआत में 5 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

सहकारिता विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली स्थायी वित्त समिति की सिफारिश के बाद, वित्त विभाग ने राज्य क्षेत्र की योजना, "उर्वरकों के अग्रिम भंडारण के लिए कैश क्रेडिट लोन पर ब्याज सहायता" को लागू करने की मंजूरी दे दी है।

योजना के तहत, राज्य सरकार उर्वरकों के अग्रिम भंडारण के लिए पात्र सहकारी समितियों द्वारा लिए गए कैश क्रेडिट लोन पर 100 प्रतिशत ब्याज सहायता प्रदान करेगी।

वित्तपोषण लागत को हटाकर, सरकार का लक्ष्य सहकारी समितियों को पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने में सक्षम बनाना और मुख्य कृषि सीजन के दौरान उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से उर्वरक वितरण में सहकारी क्षेत्र की भूमिका का काफी विस्तार होगा। खरीफ 2026 सीजन से उर्वरक बिक्री में इसकी हिस्सेदारी मौजूदा 25-30 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 60 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे निजी डीलरों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

इस योजना के लिए साल 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए 42 करोड़ रुपये का स्वीकृत बजट है। इसमें से 5 करोड़ रुपये चालू वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक पात्र सहकारी समिति को उसकी परिचालन क्षमता और उर्वरक प्रबंधन आवश्यकताओं के आधार पर 10 लाख रुपये तक की कैश क्रेडिट सीमा प्रदान की जाएगी।

सरकार उर्वरक बिक्री केंद्रों पर क्यूआर कोड-आधारित लेनदेन को भी बढ़ावा देगी। इससे बिक्री की बेहतर निगरानी हो सकेगी। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि सरकार द्वारा अधिसूचित कीमतों पर ही उर्वरक मिले।

अधिकारियों ने कहा कि यह किसान-केंद्रित पहल सहकारी वितरण तंत्र को मजबूत करेगी। मुख्य कृषि सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता में सुधार करेगी। किसानों को उर्वरक की कृत्रिम कमी और उर्वरक वितरण में होने वाली अन्य गड़बड़ियों से बचायेगी।

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