भुवनेश्वर , अगस्त 26 -- ओडिशा में सुरक्षा बलों ने बुधवार को छत्तीसगढ़ सीमा के पास एक जंगल में माओवादियों के गोला-बारूद का एक बड़ा जखीरा बरामद किया। इसमें हथियार, इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस, क्लेमोर माइंस और अन्य विस्फोटक सामग्री शामिल हैं।

मलकानगिरी ज़िला स्वयंसेवी बल की एक टीम ने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर मैथिली पुलिस स्टेशन इलाके में चेरकोटला, किरमिटी, कोटवापादार और कडाभाटा के जंगलों में सुबह करीब 5:30 बजे सघन तलाशी अभियान शुरू किया।

यह इलाका ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित है और छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले में दरभा पुलिस स्टेशन तथा सुकमा ज़िले में पुस्पाल पुलिस स्टेशन के अधिकार-क्षेत्र से सटा हुआ है।

पुलिस के अनुसार, बरामद हथियार, विस्फोटक और अन्य सामान माओवादी आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल ज़ोनल कमेटी के कैडरों द्वारा छिपाए गए होने का शक है। यह भी आशंका है कि इन सामानों का इस्तेमाल आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के खिलाफ होने वाला था।

ज़ब्त किए गए सामान में देसी बंदूकें, अलग-अलग वज़न (5-किग्रा, 3-किग्रा, 2-किग्रा) के आईईडी, क्लेमोर माइन्स और शॉप-केस आईईडी शामिल थे। टीम को कोडेक्स वायर का बंडल, 10 मीटर तार, नौ-वोल्ट की तीन बैटरी और एक रेडियो एंटीना भी मिला।

ज़ब्त की गई अन्य स सामग्रियों में माओवादी बैनर और साहित्य, जैतून के रंग की माओवादी वर्दी, चार मीटर लाल कपड़ा, एक बैकपैक, रेनकोट, जैकेट, चाकू, टॉर्च, लाइटर और कैंची शामिल थे। उस जगह पर निजी उपयोग की कई चीज़ें भी मिलीं, जिनमें दवाइयां, टूथपेस्ट, टूथब्रश, तेल की बोतलें, सैंडल, शीशा, चम्मच, चश्मे का डिब्बा और स्टेशनरी का सामान शामिल था।

यह बरामदगी सुरक्षा बलों की उन कोशिशों का हिस्सा है, जिनका मकसद माओवादियों की डंप सामग्रियों का पता लगाकर उन्हें हटाना और ज़िले में चरमपंथी गतिविधियों को फिर से शुरू होने से रोकना है। पुलिस ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री के तय लक्ष्य के अनुसार, मलकानगिरी 31 मार्च, 2026 तक पूरी तरह से नक्सल-मुक्त हो गया था।

पुलिस ने बताया कि जनवरी 2025 और 31 मार्च 2026 के बीच मलकानगिरी ज़िले में दो माओवादियों को गिरफ़्तार किया गया और 23 अन्य ने आत्मसमर्पण किया।

जून 2026 में ज़िले में माओवादियों के तीन बड़े हथियार और सामान के ठिकाने (डंप) भी बरामद किए गए थे। माओवादियों द्वारा छिपाए गए हथियारों, विस्फोटकों और अन्य सामान का पता लगाने और उन्हें बरामद करने, तथा विद्रोह को फिर से शुरू करने की किसी भी कोशिश को रोकने के लिए, संवेदनशील जंगली इलाकों में विशेष अभियान दल और डीवीएफ टीमों द्वारा लगातार खोज एवं तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं।

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