भुवनेश्वर , अक्टूबर 21 -- होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ ओडिशा (एचआरएओ) ने ओडिशा को एक '21-रात का पर्यटन स्थल' के रूप में स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। यह एक दीर्घकालिक रणनीति है, जिसका उद्देश्य राज्य के विविध आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक एवं विरासत से जुड़े आकर्षणों को प्रदर्शित करके पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ाना, नए निवेश को आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार उत्पन्न करना है।
एचआरएओ के अध्यक्ष जे. के. मोहंती ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य को अपनी पर्यटन क्षमता का पूरा लाभ उठाने के लिए एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित करने, अवसंरचना एवं पर्यटकों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने, घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने, तथा आतिथ्य शिक्षा एवं कौशल विकास का विस्तार करने की आवश्यकता है।
एचआरएओ 23 अक्टूबर को सातवें ओडिशा पर्यटन संगोष्ठी का आयोजन करेगा, जिसमें पर्यटन-आधारित विकास, निवेश एवं रोजगार सृजन को गति देने की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी।
इस संगोष्ठी में पुरी के पास स्थित समुका बीच की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी, जहां सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत एक विश्व स्तरीय थीम पार्क, प्रीमियम होटल, मनोरंजन सुविधाएं, एक सम्मेलन केन्द्र और सहायक अवसंरचना विकसित किया जा सकता है।
उप मुख्यमंत्री प्रवती परिदा इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगी, जिसमें पर्यटन क्षेत्र के उभरते अवसरों एवं चुनौतियों पर केंद्रित पैनल चर्चाएं होंगी।
श्री मोहंती ने कहा कि प्रस्तावित '21-रात का पर्यटन स्थल' दृष्टिकोण का उद्देश्य पर्यटकों को भुवनेश्वर-पुरी-कोणार्क के पारंपरिक सर्किट से आगे की जगहों पर जाने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि ओडिशा में आध्यात्मिक विरासत, बौद्ध स्थल, प्राचीन मंदिर, वन्यजीव, समुद्र तट, झीलें, आदिवासी संस्कृति, हथकरघा, हस्तशिल्प और खान-पान का बेहतरीन संगम है जो लंबी छुट्टियों के लिए बहुत संभावनाएं प्रस्तुत करता है।
श्री मोहंती ने कहा कि पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि और उनके खर्च को बढ़ाने के साथ-साथ, उनके आगमन में वृद्धि करने से होटल अधिभोग, टूर संचालन, स्थानीय परिवहन, रेस्तरां, हस्तशिल्प व्यवसायों और समुदाय-आधारित उद्यमों को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने सतत पर्यटन को बढ़ावा देने का आह्वान किया, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक अवसर उत्पन्न हों और साथ ही राज्य के प्राकृतिक पर्यावरण एवं सांस्कृतिक विरासत की रक्षा भी हो सके।
इस सम्मेलन में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इनमें पर्यटन विपणन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका एवं यात्रा का भविष्य, संपर्क, पर्यटन स्थल प्रबंधन, पर्यटन वित्त एवं अवसंरचना, पारिस्थितिकी पर्यटन, जनजातीय पर्यटन, इको रिट्रीट, ओड़िया व्यंजनों का प्रचार-प्रसार तथा ओडिशा में बैठकों, प्रोत्साहन यात्राओं, सम्मेलनों और प्रदर्शनियों (एमआईसीई) एवं विवाह समारोहों के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में विकसित करने जैसे विषय शामिल हैं।
ओडिशा में लगभग 15,000 अतिरिक्त होटल कमरों की सुविधा उपलब्ध कराने की राज्य सरकार की पहल का स्वागत करते हुए श्री मोहंती ने कहा कि इस विस्तार से आतिथ्य अवसंरचना मजबूत होगा और एमआईसीई पर्यटन, डेस्टिनेशन वेडिंग, आध्यात्मिक पर्यटन एवं अवकाश यात्रा जैसे उभरते क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि 15,000 होटल कमरों को जोड़ने के प्रस्ताव से 10,000 करोड़ रुपये तक का निवेश प्राप्त हो सकता है। साथ ही, प्रति कमरे तीन कर्मचारियों की अनुमानित जरूरत के हिसाब से आतिथ्य क्षेत्र में लगभग 45,000 कुशल कर्मचारियों की मांग पैदा हो सकती है।
श्री मोहंती ने कहा कि इस विस्तार से राज्य में और अधिक होटल प्रबंधन संस्थान, आतिथ्य प्रशिक्षण केंद्र और कौशल विकास संस्थान स्थापित करने के अवसर भी उत्पन्न होंगे।
सातवें ओडिशा पर्यटन सम्मेलन का उद्देश्य सरकार एवं उद्योग के बीच बेहतर सहयोग के माध्यम से एक समन्वित रोडमैप तैयार करना है ताकि राज्य की पर्यटन क्षमता को ठोस आर्थिक परिणामों में बदला जा सके।
श्री मोहंती ने कहा कि विचार-विमर्श से निकले सुझावों को एक साथ संकलित किया जाएगा और समापन समारोह में ओडिशा के राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इन सुझावों को राज्य सरकार के पास भी भेजा जाएगा ताकि वह उन पर विचार कर सके और उन्हें लागू कर सके।
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करना और ऐसी व्यावहारिक रणनीतियां तैयार करना है जिनसे ओडिशा में पर्यटन के क्षेत्र में निवेश आकर्षित हो सके, रोजगार के अवसर उत्पन्न हों और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा मिले।
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