भुवनेश्वर , जून 18 -- ओडिशा का 'कंप्रिहेंसिव रीजनल अर्बन ट्रांसपोर्ट' (सीआरयूटी) इलेक्ट्रिक बसों के तेजी से विस्तार और नयी तकनीकों के उपयोग के जरिए शहरी परिवहन में बड़ा बदलाव लाने के साथ ही टिकाऊ और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक परिवहन का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभर रहा है।

वर्ष 2024 से अप्रैल 2026 के बीच सीआरयूटी ने अपने सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया है, जिससे सक्रिय बसों की संख्या बढ़कर 760 हो गयी है और राज्य में हरित तथा टिकाऊ परिवहन को नयी गति मिली है।

इलेक्ट्रिक परिवहन के विस्तार की शुरुआत साल 2024 में संबलपुर और बेरहामपुर में ई-बस सेवाओं के साथ हुई थी, जिसके बाद 2025 में राजधानी क्षेत्र में 80 मध्यम आकार की इलेक्ट्रिक बसें, पांच इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसें, पुरी में 35 इलेक्ट्रिक बसें और नराज में 100 इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गयी। वर्ष 2026 में क्योंझर 25 इलेक्ट्रिक बसों के साथ ओडिशा के बढ़ते इलेक्ट्रिक बसों के नेटवर्क में शामिल हो गया है। इस बढ़ते बेड़े के संचालन के लिए सीआरयूटी ने गदकना, नराज, पुरी, संबलपुर, बेरहामपुर और क्योंझर में आधुनिक बस डिपो शुरू किये हैं।

इसके साथ ही चंद्रशेखरपुर और मास्टर कैंटीन में इलेक्ट्रिक बस टर्मिनल बनाये गये हैं और कटक में 153 नये बस अड्डे विकसित करके परिवहन व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

राज्य के आवास और शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र ने कहा कि सरकार सुरक्षित, सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। सीआरयूटी की यह प्रगति शहरों को स्मार्ट और हरित बनाने के लक्ष्य को दर्शाती है।

विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाधी ने कहा कि राज्य सरकार लंबे समय के दृष्टिकोण के साथ टिकाऊ और आधुनिक परिवहन प्रणाली विकसित कर रही है।

सीआरयूटी के प्रबंध निदेशक मो. सिद्दीकी आलम ने बताया कि अब रोजाना औसतन तीन लाख से अधिक यात्री बसों से यात्रा कर रहे हैं और लगभग 45 प्रतिशत किराया डिजिटल माध्यम से मिल रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए 'आमा बस' टिकट प्रणाली, व्हाट्सएप के माध्यम से टिकट बुक करने, स्वचालित टिकट मशीनें और 'नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड' जैसी सेवाएं शुरू की गयी हैं।

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